धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर का बड़ा खतरा, नए शोध में दुर्लभ जेनेटिक म्यूटेशन का खुलासा

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New Delhi News: फेफड़ों के कैंसर को लेकर आमतौर पर माना जाता है कि यह केवल धूम्रपान करने वालों को होता है। हालिया वैज्ञानिक शोध ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। अध्ययन के अनुसार कभी धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के गंभीर मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित करीब 20 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्होंने जीवन में कभी धूम्रपान नहीं किया। 33 लाख से अधिक लोगों के डेटा पर हुए इस व्यापक अध्ययन में पाया गया कि जीन में होने वाला एक दुर्लभ बदलाव इस बीमारी के जोखिम को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा देता है।

दुर्लभ ईजीएफआर म्यूटेशन से 60 गुना तक बढ़ा खतरा

साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर (ईजीएफआर) जीन में होने वाला बदलाव फेफड़ों के कैंसर का खतरा 25 गुना तक बढ़ाता है। विशेष रूप से ईजीएफआर टी790एम नामक म्यूटेशन धूम्रपान करने वालों में यह जोखिम 10 गुना तक कर देता है।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने कभी धूम्रपान नहीं किया, उनमें यह म्यूटेशन होने पर कैंसर की आशंका 60 गुना से अधिक हो जाती है। इसके अलावा असामान्य रूप से जुड़ने वाले दो जीन फ्यूजन प्रोटीन बनाते हैं, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास को लगातार बढ़ावा देने का काम करते हैं।

भविष्य में जेनेटिक जोखिम के आधार पर होगी स्क्रीनिंग

बोस्टन स्थित डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता डॉ. जैकलिन लोपिकोलो के अनुसार वर्तमान में स्क्रीनिंग मुख्य रूप से धूम्रपान के इतिहास पर आधारित है। नई खोज से भविष्य में वंशानुगत जेनेटिक जोखिम के आधार पर जांच की संभावना बनी है। राहत की बात यह है कि यह म्यूटेशन अन्य 17 कैंसरों से जुड़ा नहीं मिला।

Desh Raj
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