Delhi News: पेट में दर्द, एसिडिटी और सीने में जलन से राहत पाने के लिए अक्सर लोग पारंपरिक घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। हालांकि, ये तरीके कुछ समय के लिए आराम जरूर पहुंचाते हैं, लेकिन कुछ घंटों बाद पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाकर समस्या को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।
इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रियम बोरडोलोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि कई मशहूर देसी नुस्खे शुरुआत में राहत देने के बाद शरीर में स्टमक एसिड प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ा देते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति की परेशानी पहले से ज्यादा बढ़ जाती है।
एसिडिटी दूर करने वाले आम नुस्खे कैसे बनते हैं मुसीबत
आमतौर पर लोग एसिडिटी भगाने के लिए ठंडा दूध पीने, गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर सेवन करने, केला खाने या जिंजर टी यानी अदरक की चाय पीने जैसे नुस्खे आजमाते हैं। डॉक्टर के अनुसार, ठंडा दूध पीना एसिडिटी दूर करने का सबसे खराब तरीका साबित हो सकता है, भले ही यह तुरंत आराम दे।
दूध में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में मौजूद गैस्ट्रिन नामक हार्मोन को ट्रिगर करती है। यह हार्मोन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रोटीन पचाने के लिए ज्यादा एसिड बनाने का सिग्नल देता है। नतीजतन, एक से दो घंटे के बाद ही एसिडिटी की समस्या फिर से बढ़ जाती है।
जानिए क्या है गैस्ट्रिन हार्मोन और इसका मुख्य कार्य
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, गैस्ट्रिन एक बेहद जरूरी हार्मोन है जो पाचन क्रिया में मदद करता है। यही हार्मोन पेट को एसिड छोड़ने का सिग्नल भेजता है। इसके अलावा, यह डाइजेस्टिव सिस्टम में भोजन को आगे बढ़ाने वाली मसल्स को प्रमोट करता है और पाचन एंजाइमों के निर्माण को भी बढ़ावा देता है।
पाचन क्रिया को सही तरीके से चलाने में इन सभी प्रक्रियाओं का अहम योगदान होता है। हालांकि, जब शरीर में गैस्ट्रिन का स्तर बहुत अधिक या असामान्य रूप से कम हो जाता है, तो यह सामान्य पाचन प्रक्रिया को बिगाड़ देता है। इसी वजह से लोगों को एसिड रिफ्लक्स और पेट में अल्सर जैसी गंभीर दिक्कतें होने लगती हैं।