थायरॉइड की समस्या से हैं परेशान? गले की ग्रंथियों को एक्टिव रखने में मदद करेंगे ये 3 असरदार योगासन

Share

- Advertisement -

Health Desk: आधुनिक जीवनशैली में खराब खानपान, तनाव और अनियमित दिनचर्या का सीधा असर थायरॉइड ग्रंथि पर पड़ रहा है। तितली के आकार की यह ग्रंथि हार्मोन्स को नियंत्रित करती है। इसमें गड़बड़ी होने पर तेजी से वजन बढ़ना या घटना, अत्यधिक थकान, मूड स्विंग्स और बाल झड़ने जैसी परेशानियां शरीर को घेरने लगती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योगाभ्यास के जरिए थायरॉइड ग्रंथि के कामकाज को बेहतर बनाया जा सकता है। कुछ विशेष आसन गले के हिस्से में रक्त संचार बढ़ाकर हार्मोन्स को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। अपनी दिनचर्या में इन तीन योगासनों को शामिल करके आप थायरॉइड की समस्या से काफी हद तक राहत पा सकते हैं।

हलासन से गले पर दबाव बनाकर ग्रंथि करें सक्रिय

हलासन करते समय शरीर का आकार पारंपरिक हल जैसा दिखाई देता है। यह आसन गले के क्षेत्र पर सीधा दबाव डालकर थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसे करने के लिए योगा मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को शरीर के बगल में फर्श पर रखें।

इसके बाद गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे सिर के पीछे ले जाएं। पैरों के पंजों को जमीन से छूने का प्रयास करें। कुछ सेकंड अपनी क्षमता के अनुसार इस मुद्रा में रुकने के बाद धीरे-धीरे पुरानी स्थिति में वापस आ जाएं। यह अभ्यास गले की मांसपेशियों को मजबूती भी देता है।

मत्स्यासन और भुजंगासन से हार्मोन्स रखें संतुलित

मत्स्यासन को फिश पोज भी कहा जाता है, जो थायरॉइड के लिए बेहद असरदार है। इसमें पीठ के बल पद्मासन लगाकर कोहनियों के सहारे छाती और सिर को ऊपर उठाया जाता है। इससे गर्दन और गले में बेहतरीन खिंचाव आता है, जिससे ग्रंथि में ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बेहतर होने लगता है।

भुजंगासन यानी कोबरा पोज भी थायरॉइड में बहुत लाभकारी है। इसमें पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाया जाता है। गर्दन को पीछे झुकाकर कुछ सेकंड रुकने और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आने से ग्रंथियों का हार्मोनल संतुलन बना रहता है।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News