Delhi News: डायबिटीज के मरीजों में दिल की गंभीर बीमारियों और हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से खून की नलियों को भारी नुकसान पहुंचता है। विशेषज्ञों ने नियमित जांच कराने की सख्त सलाह दी है ताकि किसी बड़े खतरे से समय रहते बचा जा सके।
सर गंगा राम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अश्विन मेहता ने बताया कि डायबिटीज दिल के रोगों की मुख्य वजह है। हाई शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में सूजन से खून की नसों की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी से नसों को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
डॉ. मेहता के अनुसार डायबिटीज रोगियों में अक्सर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड भी बढ़ जाता है। इससे धमनियों में प्लाक जमने का खतरा काफी अधिक होता है। साथ में हाई ब्लड प्रेशर होने पर अटैक का जोखिम दोगुना हो जाता है। इसलिए डॉक्टर ऐसे मरीजों का इलाज पहले से दिल के मरीज मानकर ही करते हैं।
गैस का दर्द समझकर अस्पताल पहुंचा मरीज निकली तीन नसें ब्लॉक
डॉक्टर ने 45 वर्षीय मरीज का उदाहरण देते हुए बताया कि वह पेट में गैस और बेचैनी समझकर इमरजेंसी पहुंचे थे। जांच में पता चला कि उनकी तीनों नसें पूरी तरह बंद थीं। करीब 10 साल से डायबिटीज से पीड़ित इस मरीज को बाईपास सर्जरी करानी पड़ी, जबकि उन्हें सीने में दर्द बिल्कुल नहीं था।
मेदांता के सीएमडी डॉ. नरेश त्रेहान ने बताया कि डायबिटीज दिल तक दर्द का संदेश ले जाने वाली नसों को नुकसान पहुंचाती है। इससे शरीर का चेतावनी देने वाला सिस्टम बंद हो जाता है। मरीज को सीने में दर्द का अहसास नहीं होता और अंदर ही अंदर दिल को भारी नुकसान पहुंचता रहता है।
डायबिटीज के मरीज हर साल नियमित इकोकार्डियोग्राम जांच जरूर करवाएं
डॉ. त्रेहान ने कहा कि कई मरीजों का दिल केवल 20 फीसदी काम कर रहा होता है और उन्हें पता भी नहीं चलता। सांस फूलने की समस्या बढ़ने पर जांच में यह सच सामने आता है। उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे डायबिटीज रोगियों की हर साल इकोकार्डियोग्राम जांच अनिवार्य रूप से करवाएं।