हिमाचल प्रदेश में मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब खरीद में बड़ा फर्जीवाड़ा, 20 करोड़ के घपले की आशंका

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब खरीद में एजेंटों की भारी हेराफेरी का मामला सामने आया है। वर्ष 2025 में हुई करीब एक लाख टन सरकारी खरीद के रिकॉर्ड में असली आपूर्ति से कई गुना अधिक सेब दिखाया गया है। इस फर्जीवाड़े में करीब 20 करोड़ रुपये के घपले की आशंका है।

संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम स्तर की जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी गई है। शिमला, चंबा और मंडी जिलों में सैकड़ों ऐसे मामले मिले हैं। सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े शिमला जिले के रोहड़ू, कोटखाई, चौपाल, ठियोग और रामपुर क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं, जहां सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई।

रिकॉर्ड में दर्ज मिला कई गुना अतिरिक्त सेब

पूछताछ के दौरान कई बागवानों ने खुलासा किया कि उन्होंने एचपीएमसी को जितनी फसल बेची, रजिस्टरों में उससे कहीं ज्यादा मात्रा दर्ज की गई। कई किसानों ने 50 से 100 बोरी सेब जमा कराया, जबकि उनके नाम पर 200 से 350 बोरी तक की एंट्री पाई गई। इस अंतर ने पूरे खरीद सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन ने जब जमीन के दस्तावेज और पहचान पत्र मांगना शुरू किया, तो कई लोग भुगतान लेने ही नहीं पहुंचे। कोटखाई के गुम्मा निवासी एक बागवान ने 66 बोरी बेचीं, लेकिन रिकॉर्ड में 130 बोरी दर्ज मिलीं। इसी तरह एक अन्य किसान की 200 बोरी के बदले 378 बोरी दर्ज कर फर्जीवाड़ा करने का प्रयास किया गया।

जांच के दायरे में आए एजेंट और जिम्मेदार अधिकारी

जांच अधिकारियों का कहना है कि गड़बड़ी के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। खरीद केंद्रों पर वास्तविक पर्चियों और सरकारी आंकड़ों का तेजी से मिलान किया जा रहा है। मामले की पुष्टि होने पर दोषी एजेंटों और फर्जी रिकॉर्ड बनाने वाले कर्मचारियों पर सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा। बागवानी विभाग ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

Desh Raj
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