भारतीय त्योहारी बाजार में लग्जरी मिठाई और क्राफ्ट चॉकलेट का दबदबा, बदल गया पारंपरिक गिफ्टिंग का पूरा गणित

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New Delhi News: भारतीय कन्फेक्शनरी बाजार में त्योहारी गिफ्टिंग का मिजाज तेजी से बदल रहा है। देश के संपन्न ग्राहक अब आम मिठाई और साधारण चॉकलेट के बजाय लग्जरी मिठाई और क्राफ्ट चॉकलेट पर खुलकर खर्च कर रहे हैं। मनम और खोया जैसे प्रीमियम ब्रांड्स इस नए बाजार की अगुवाई कर रहे हैं।

पारंपरिक हलवाई और खुले डिब्बों वाला बाजार अब आधुनिक स्वरूप ले चुका है। नील्सनआईक्यू के आंकड़ों के मुताबिक देश का चॉकलेट बाजार करीब 24 हजार करोड़ रुपये का है। यह बाजार 10 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है। इसमें सबसे तेज रफ्तार 4500 करोड़ रुपये वाले लग्जरी सेगमेंट में दिख रही है।

लग्जरी चॉकलेट का यह प्रीमियम बाजार 17 प्रतिशत की वार्षिक रफ्तार से आगे दौड़ रहा है। इसमें ब्रांड्स की सीधी बिक्री और कॉरपोरेट ऑर्डर शामिल नहीं हैं। उधर मॉडर्न ट्रेड में प्रीमियम मिठाइयों की औसत बिक्री कीमत एक साल में 40 फीसदी तक चढ़ी है। सामान्य मिठाइयों में सिर्फ 10 फीसदी तेजी आई है।

प्रीमियम मिठाई और हस्तनिर्मित स्वाद का नया दौर

खोया और गुड़ चीनी जैसे ब्रांड्स ने मिठाई की पुरानी पहचान बदल दी है। खोया के फाउंडर सिड माथुर के मुताबिक उनकी टीम ने पारंपरिक रेसिपी पर महीनों काम किया। खोया की मिठाइयां बिना मशीनों के हाथ से तैयार होती हैं। भुने बेसन के लड्डू का 10 पीस का डिब्बा 1200 रुपये में मिलता है।

खास ग्राहकों के लिए 24 कैरेट सोने के वर्क वाली गोल्ड पिस्ता कतली 11 हजार रुपये में उपलब्ध है। यह मिठाई अब स्वाद के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। इसी के समानांतर भारत में सिंगल ओरिजिन ककाओ बीन्स से बनी क्राफ्ट चॉकलेट का तेजी से उभार हुआ है।

हैदराबाद के मनम चॉकलेट और कोच्चि के पॉल एंड माइक जैसे ब्रांड्स बीन-टू-बार मॉडल पर काम कर रहे हैं। मनम के फाउंडर चैतन्य मुप्पाला का कहना है कि उपहार देने योग्य हर उत्पाद सीधी प्रतिस्पर्धा में आता है। मनम के गिफ्ट बॉक्स 1700 रुपये से लेकर 8595 रुपये तक की कीमत में बिकते हैं।

गिफ्टिंग मॉडल पर टिका दोनों श्रेणियों का कारोबार

दोनों श्रेणियों के ग्राहकों का औसत खर्च लगभग एक समान है। मनम पर प्रति ग्राहक औसत खर्च 1800 रुपये है, जबकि खोया पर यह 1750 रुपये बैठता है। दोनों ब्रांड्स का कारोबार मुख्य रूप से उपहारों पर निर्भर है। मनम का 60 से 80 प्रतिशत और खोया का 90 प्रतिशत राजस्व गिफ्टिंग से ही आता है।

कॉरपोरेट जगत ने पुराने ढर्रे के काजू कतली के डिब्बों के बजाय नए विकल्प अपना लिए हैं। नील्सनआईक्यू के कस्टमर सक्सेस हेड शरंग पंत के अनुसार प्रीमियम ब्रांड्स गिफ्टिंग उत्पाद बनाने में माहिर हो चुके हैं। इस बढ़ती मांग के बीच दोनों श्रेणियों के बीच का अंतर भी तेजी से कम हो रहा है।

मुंबई का बॉम्बे स्वीट शॉप पारंपरिक पतीसा को आधुनिक चॉकलेट बार के रूप में बेच रहा है। बॉम्बे स्वीट शॉप के को-फाउंडर यश भाणगे के अनुसार दोनों श्रेणियों की सीमाएं मिट रही हैं। उनका 2900 रुपये वाला गिफ्ट हैंपर खूब बिकता है। दिवाली के दिनों में उनका औसत ऑर्डर 1800 रुपये तक पहुंच जाता है।

दूसरी तरफ मनम जैसी कंपनियां मिठाई उद्योग के दशकों पुराने अनुभवों को चॉकलेट पैकेजिंग में ढाल रही हैं। अब दिवाली कई आयोजनों का समूह बन चुकी है। सुबह की पूजा के लिए शुद्ध देसी मिठाई खरीदी जाती है, तो शाम की पार्टियों के लिए क्राफ्ट चॉकलेट का चुनाव हो रहा है।

ई-कॉमर्स और तापमान नियंत्रित डिलीवरी ने इन प्रीमियम उत्पादों को छोटे शहरों तक पहुंचा दिया है। जयपुर, इंदौर, लखनऊ और सूरत के संपन्न ग्राहक अब स्थानीय हलवाई के बजाय ऑनलाइन प्रीमियम डिब्बे मंगा रहे हैं। शानदार पैकेजिंग, गुणवत्ता और कहानी के दम पर नया बाजार पारंपरिक हलवाइयों को कड़ी चुनौती दे रहा है।

Right News Desk
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लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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