Delhi News: भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर महीने में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा सकता है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महंगाई का जोखिम बना हुआ है। वित्त वर्ष 2027 में दरें 6 फीसदी तक पहुंच सकती हैं। इस बदलाव से आम लोगों के कर्ज महंगे होंगे और लोन की मासिक किस्त भी बढ़ेगी।
लोन की किस्त और बेंचमार्क ब्याज दरों पर सीधा असर
यूनियन बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर रिजर्व बैंक ने दरें बढ़ाईं तो नया लोन लेना काफी महंगा हो जाएगा। पहले से चल रहे सभी तरह के लोन की ईएमआई भी बढ़ जाएगी। केंद्रीय बैंक के इस कड़े रुख से वित्त वर्ष 2027 तक रेपो रेट 5.75 से 6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक यील्ड में तेजी के कारण सितंबर में भारतीय सरकारी बॉन्ड पर भारी दबाव रहा। इसके अलावा घरेलू बॉन्ड की ज्यादा आपूर्ति ने यील्ड को लगातार ऊपर बनाए रखा। रिजर्व बैंक की ओपन मार्केट ऑपरेशन सेल और लंबी अवधि के नए बॉन्ड जारी करने से भी दबाव काफी बढ़ गया।
सरकारी बॉन्ड यील्ड और बाजार में बढ़ती लिक्विडिटी की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में 5-साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 45 बेसिस पॉइंट बढ़ गई। वहीं 10-साल वाले बॉन्ड की यील्ड 24 बेसिस पॉइंट बढ़ी। दोनों के बीच का अंतर 36 से घटकर 16 बेसिस पॉइंट रह गया। सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये की ग्रॉस बॉरोइंग जुटाने की योजना बना रही है।
सक्रिय स्विच ऑक्शन की वजह से शुद्ध उधारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इस व्यवस्था से वित्त वर्ष 2027 में रिडेम्पशन की जरूरतें कम हुई हैं। दूसरी ओर रिजर्व बैंक ने वीआरआरआर और ओएमओ सेल के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये सोख लिए। इससे बैंकिंग व्यवस्था का लिक्विडिटी सरप्लस घटकर 4.85 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।