नेशनल कॉन्फ्रेंस की बैठक में नाराज विधायकों के सामने भावुक हुए उमर अब्दुल्ला, बोले- भरोसा नहीं तो दे दूंगा इस्तीफा

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Srinagar News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पार्टी विधायकों की नाराजगी के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की बैठक में इस्तीफे की पेशकश की। गुपकार में हुई इस बैठक में विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी की कार्यशैली और मंत्रिमंडल में सुनवाई न होने पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद तनाव टालने के लिए समितियां गठित करने पर सहमति बनी।

जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। श्रीनगर के गुपकार स्थित पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर शुक्रवार को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को अपने ही विधायकों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि विधायकों को उन पर भरोसा नहीं है, तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में उमर अब्दुल्ला तीन बार उठकर बाहर चले गए, जिसके बाद विधायकों ने उन्हें मनाकर वापस बैठाया।

सलाहकार नासिर असलम वानी और मंत्रिमंडल को लेकर असंतोष

बैठक में मौजूद कम से कम 15 विधायकों ने सरकार के कामकाज और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए। विधायकों की मुख्य नाराजगी मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी की भूमिका को लेकर थी। विधायकों का आरोप है कि सरकार में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासनिक फैसलों में एक सलाहकार का दखल जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है।

पिछले महीने हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही पार्टी के कई विधायक असंतुष्ट चल रहे थे। उन्होंने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने और सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग पार्टी नेतृत्व के सामने सीधे तौर पर रखी।

बैठक में उमर अब्दुल्ला की पेशकश और फारूक अब्दुल्ला का रुख

बैठक के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि विधायकों को उनकी टीम पर विश्वास नहीं है, तो इसका सीधा अर्थ यह है कि उन्हें मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर भी भरोसा नहीं रहा। ऐसी स्थिति में उनके पद पर बने रहने का कोई नैतिक औचित्य नहीं बनता। हालांकि, नाराज विधायकों ने यह स्पष्ट किया कि उनका विरोध व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री से नहीं है, बल्कि वे उस कार्यप्रणाली को बदलना चाहते हैं जिसमें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी हो रही है।

बैठक में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने विधायकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के साथ-साथ उनकी कुछ शिकायतों को जायज भी ठहराया। बैठक से पहले बाहर एकजुटता दिखाने और पार्टी में टूट से इनकार करने के बावजूद अंदर माहौल बेहद तनावपूर्ण बना रहा।

टकराव टालने के लिए समितियां गठित

बैठक में पैदा हुए गतिरोध को तत्काल समाप्त करने के लिए कुछ सलाहकार समितियां गठित करने और संवाद जारी रखने पर सहमति बनी है। हालांकि, नाराज विधायकों की प्रमुख मांगों—जैसे नासिर असलम वानी की भूमिका सीमित करने और मंत्रिमंडल में बदलाव—पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 42 वर्षों में यह पहला अवसर है जब अनुशासन के लिए पहचानी जाने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने इस प्रकार खुलकर पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली को चुनौती दी है। पार्टी पहले से ही सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे और राज्य का दर्जा बहाल होने में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक दबाव में है। ऐसे में समितियों के गठन से टकराव फिलहाल टल जरूर गया है, लेकिन असंतुष्ट विधायकों की वास्तविक चिंताओं का स्थायी समाधान निकलना अभी बाकी है।

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