Nagpur News: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय की चर्चाओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों दल स्वतंत्र हैं, लेकिन यदि विलय को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है, तो महायुति और राजग (एनडीए) के प्रमुख सहयोगी दल के नाते भाजपा से सलाह जरूर ली जाएगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के एक साथ आने की अटकलों ने एक बार फिर सियासी पारा चढ़ा दिया है। नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दोनों गुट स्वतंत्र राजनीतिक दल हैं और वे अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि महायुति और एनडीए में शामिल होने के कारण किसी भी बड़े फैसले से पहले भाजपा के साथ विचार-विमर्श जरूरी होगा।
दोनों दल स्वतंत्र, लेकिन एनडीए से सलाह जरूरी: फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एनसीपी या शरद पवार गुट के आंतरिक मामलों पर किसी तीसरे पक्ष द्वारा टिप्पणी करना उचित नहीं है। दोनों पक्ष अपनी भविष्य की रणनीति तय करने में सक्षम हैं।
इसके साथ ही उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि यदि वे ऐसा कोई कदम उठाने का निर्णय लेते हैं या इस संदर्भ में कोई बातचीत चल रही है, तो वे हमसे सलाह अवश्य लेंगे। हम महायुति और एनडीए में एक प्रमुख साझेदार हैं।” मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि मौजूदा समय तक किसी भी गुट ने इस विषय पर भाजपा से कोई संपर्क नहीं किया है और न ही किसी आधिकारिक बातचीत की सूचना दी है। यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव सामने आता है, तभी पार्टी अपना रुख तय करेगी।
एक मुलाकात और बयानों से गरमाई सियासत
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चाओं को हालिया घटनाक्रमों से बल मिला है। हाल ही में एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल की मुंबई के एक अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात का वीडियो सामने आया था। इसके अलावा 10 नवंबर के बाद दोनों पक्षों के बीच संभावित बैठक को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं।
वहीं, एनसीपी नेता सुनील तटकरे के हालिया बयान ने इन कयासों को और हवा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि परिस्थितियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पहले ही सहमति बन सकती थी। वर्तमान में शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) का हिस्सा है, जबकि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला गुट सत्ताधारी महायुति सरकार में शामिल है।
गोकुल डेयरी पर नियंत्रण के आरोपों को नकारा
विलय की चर्चाओं के अलावा मुख्यमंत्री फडणवीस ने कोल्हापुर की प्रसिद्ध गोकुल डेयरी को लेकर सरकार पर लग रहे आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि राज्य सरकार गोकुल डेयरी या किसी अन्य संस्था पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोकुल डेयरी एक जिले और कुछ तालुकों तक सीमित संस्था है, जिसके चुनाव में लगभग 5,000 मतदाता हिस्सा लेते हैं। ऐसे में राज्य सरकार का ऐसी संस्थाओं के प्रशासनिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य या हित नहीं है।