Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी को धमकाने और जांच में रुकावट डालने के आरोपी ट्रैफिक पुलिसकर्मी को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुलिसकर्मी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि गलत नीयत और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले को कोई राहत नहीं मिल सकती।
जस्टिस जिया लाल भारद्वाज ने मामले की सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अदालत के सामने साफ नीयत से नहीं आता, वह किसी भी कानूनी राहत का हकदार नहीं है। मामला जून 2009 का है, जब काला अंब ट्रैफिक पुलिस में तैनात याचिकाकर्ता के भाई को नाहन पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में पकड़ा था।
इस कार्रवाई से नाराज होकर याचिकाकर्ता ने नाहन की ‘कच्चा टैंक’ पुलिस चौकी के इंचार्ज के साथ गाली-गलौज और बदसलूकी की। इसके बाद जब एएसआई गवाहों के बयान दर्ज करने गोविंदगढ़ मोहल्ले पहुंचे, तो उसने भीड़ जुटाकर उन पर हमला करने की कोशिश की। इस गंभीर दुर्व्यवहार के बाद विभाग ने उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की थी।
विभाग ने जांच के बाद उसकी 5 साल की मंजूर सेवा जब्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि अनुशासित फोर्स का सदस्य होने के नाते पुलिसकर्मी की यह हरकत बेहद शर्मनाक थी। पहले उसे नौकरी से बर्खास्त किया जाना था, लेकिन भविष्य को देखते हुए विभाग ने 5 साल की सर्विस जब्त करने का जो फैसला लिया, वह पूरी तरह सही है।