Shimla News: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़कों में गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों को दूर करने की समय-सीमा छह महीने से बढ़ाकर एक साल कर दी है। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने सभी राज्यों को इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। एजेंसी के निदेशक सुनील कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अब राष्ट्रीय गुणवत्ता निगरानीकर्ताओं की आपत्तियों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने के लिए 12 महीने का समय मिलेगा।
प्रतिकूल मौसम और बर्फबारी को देखते हुए लिया फैसला
लाहौल-स्पीति, किन्नौर और पांगी-भरमौर जैसे इलाकों में सर्दियों की भारी बर्फबारी और भूस्खलन के कारण निर्माण कार्य अक्सर महीनों तक ठप रहते हैं। सड़कें बंद रहने से मशीनरी और सामग्री पहुंचाना भी संभव नहीं हो पाता। ऐसी परिस्थितियों में छह महीने की पुरानी मियाद में कमियों को सुधारना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था।
राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल तकनीकी जटिलताओं और निर्माण स्थलों की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दी गई है। हालांकि गुणवत्ता नियंत्रण नियमों में कोई ढिलाई नहीं होगी। यदि निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं की गईं, तो संबंधित निर्माण का भुगतान रोक दिया जाएगा।
इसके अलावा एक्शन टेकन रिपोर्ट लंबित रहने की स्थिति में ऑनलाइन निगरानी प्रणाली (ओएमएमएएस) पर भौतिक प्रगति दर्ज करने पर रोक का नियम पहले की तरह प्रभावी रहेगा। यह संशोधित समय-सीमा केवल वर्तमान में निर्माणाधीन सड़कों पर लागू होगी, जबकि पहले से पूरी हो चुकी परियोजनाओं के लिए पुराने नियम ही मान्य रहेंगे।
