हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की सुगबुगाहट तेज, सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग का किया गठन

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव से करीब 13 महीने पहले सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया है। इससे प्रदेश में नए प्रशासनिक जिले बनने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

हिमाचल में साल 1972 के बाद से कोई नया राजस्व जिला नहीं बना है। वर्तमान में राज्य के सबसे बड़े जिले कांगड़ा और मंडी के पुनर्गठन की चर्चाएं जोरों पर हैं। इसके अलावा रामपुर, पालमपुर, नूरपुर, देहरा और सुंदरनगर को भी पूर्ण जिला बनाने की मांग काफी समय से उठती रही है।

प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए सरकार ने गठित किया नया आयोग

राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार ने जिलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा का रास्ता साफ कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा मजबूत और प्रभावी बनाना है, ताकि दूरदराज के लोगों को मुख्यालय न दौड़ना पड़े।

राजनीतिक रूप से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। कांगड़ा में 15, मंडी में 10 और शिमला में 8 विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में सीमाओं के बदलाव का असर आने वाले चुनाव और क्षेत्रीय संतुलन पर सीधा पड़ेगा। पूर्व सरकारों के समय भी नए जिले बनाने की आवाजें उठती रही हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस कदम को उनके पुराने संगठनात्मक प्रयोगों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल पहले से बड़े जिलों को अलग-अलग इकाइयों में बांटकर काम कर रहे हैं। अब देखना होगा कि आयोग की समीक्षा से जनता को क्या राहत मिलती है।

Desh Raj
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