New Delhi News: देश में सूचना का अधिकार कानून लागू हुए 21 वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद देश के 28 सूचना आयोगों में 30 जून 2026 तक 3.85 लाख अपीलें और शिकायतें पेंडिंग हैं। सतर्क नागरिक संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिना कोई ऑर्डर जारी किए हजारों केस आवेदकों को वापस लौटाए जा रहे हैं।
सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट बताती है कि जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच नौ सूचना आयोगों ने 37,701 मामलों को बिना कोई कानूनी आदेश दिए लौटा दिया। इनमें केंद्रीय सूचना आयोग के 14,603 और महाराष्ट्र के 14,140 केस शामिल हैं। इसके अलावा बिहार के 4,417 और गुजरात के 3,276 मामले बिना सुनवाई वापस किए गए।
बिना आदेश केस लौटाने पर विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
संगठन की फाउंडर अंजलि भारद्वाज ने बताया कि तय फॉर्मेट का पालन न करने या पेज नंबर जैसी मामूली कमियों पर भी अपीलें खारिज हो रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि सूचना आयोगों का मुख्य काम आम जनता को जानकारी दिलाना है। आयोगों को बेवजह के कागजी नियम बनाकर लोगों के रास्ते में रुकावटें खड़ी नहीं करनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता अमृता जोहरी के अनुसार कई गरीब और पिछड़े वर्ग के लोग बिना किसी वकील या कानूनी मदद के अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं। अगर आवेदक जरूरी बेसिक जानकारी दे देता है तो उसकी अपील पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए। इसके अलावा पांच सूचना आयोगों ने वापस लौटाए गए केसों का कोई रिकॉर्ड भी नहीं दिया।
कई राज्यों में सूचना पाने के लिए लंबा इंतजार
रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा के मुताबिक केंद्रीय सूचना आयोग में एक जनवरी से 12 अक्टूबर 2026 के बीच 9,378 पेंडिंग केस बढ़ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 14 आयोगों में फैसला आने में एक साल से ज्यादा समय लग रहा है। त्रिपुरा में 19 साल आठ महीने और मध्य प्रदेश में 19 साल दो महीने की वेटिंग है।
