Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में किसानों को खाद और उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए इसे एग्रीस्टैक के डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने का फैसला किया है। अब किसानों को एग्रीस्टैक में दर्ज की गई फसल की जानकारी के आधार पर ही संबंधित खाद और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे।
कृषि विभाग ने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पुरानी व्यवस्था में किसान किसी भी फसल के नाम पर खाद ले लेते थे, भले ही वह फसल खेत में लगी हो या न हो। नई व्यवस्था लागू होने से फर्जीवाड़े और दूसरों के नाम पर मिलने वाली खाद की शिकायतों पर पूरी तरह रोक लगेगी।
बिलासपुर और हमीरपुर जिले से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
इस नई व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बिलासपुर और हमीरपुर जिले में शुरू कर दिया गया है। सरकार ने बाकी सभी जिलों में भी इसे जल्द लागू करने के आदेश दिए हैं। अब वितरण केंद्र पर एग्रीस्टैक में दर्ज फसल के ब्यौरे का सीधे तौर पर मिलान किया जाएगा।
यदि किसान के खेत के रिकॉर्ड में गेहूं दर्ज है तो उसे केवल गेहूं के लिए निर्धारित उर्वरक मिलेगा। इसी तरह मक्का और धान की खेती करने वाले पात्र किसानों को उनकी फसल के तय मापदंडों के अनुसार ही खाद दी जाएगी। इससे मनमाने ढंग से खाद उठाने की प्रथा समाप्त हो जाएगी।
डिजिटल किसान रजिस्ट्री से पारदर्शी होगा उर्वरकों का वितरण
एग्रीस्टैक के तहत किसान की पहचान, भूमि का ब्यौरा और बोई गई फसल की जानकारी को डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। किसान रजिस्ट्री के जरिए किसान अपनी जमीन के अभिलेख और फसल सर्वे का रिकॉर्ड खुद देख सकते हैं। केंद्र सरकार भी इस डेटा का उपयोग कृषि सेवाओं को पारदर्शी बनाने में कर रही है।
कृषि विभाग के सचिव सी. पालरासु ने बताया कि फसल रिकॉर्ड के आधार पर उर्वरक देने से संसाधनों का सही उपयोग होगा और वितरण में पारदर्शिता आएगी। इससे किस क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में है, इसका सटीक आकलन कर खाद की मांग और वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
विभिन्न फसलों के लिए निर्धारित खाद और उर्वरक की सूची
विभाग ने अलग-अलग फसलों के लिए उर्वरक देने के मानक तय किए हैं। गेहूं, मक्का और धान के लिए बुआई और रोपाई के समय यूरिया, डीएपी, एसएसपी और एमओपी की निर्धारित मात्रा दी जाएगी। वहीं आलू, टमाटर, बंदगोभी और फूलगोभी जैसी नकदी फसलों के लिए खेत तैयार करने और रोपाई के दौरान आधार खाद दी जाएगी।
नई व्यवस्था से एक ही किसान द्वारा जरूरत से अधिक खाद लेने या कालाबजारी की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। राज्य में खाद की आवश्यकता का सटीक पूर्वानुमान लगाकर समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे वास्तविक और पात्र किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।