Delhi News: देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बीच भारत के सामने अब एक नया जलवायु संकट खड़ा हो रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से इस बार देश में सामान्य से अधिक गर्म सर्दियां रहने और बर्फबारी में भारी गिरावट आने की आशंका है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा के चलते पहले ही खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। अब सर्दियों में तापमान बढ़ने और बर्फबारी कम होने से मिट्टी की नमी घटेगी। इसका सीधा प्रतिकूल असर रबी फसलों की बुआई और गर्मियों में पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
दिसंबर में अल नीनो का दिखेगा सबसे घातक और असरदार रूप
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर के महीने में अल नीनो अपने चरम पर पहुंच जाएगा। इसके कारण देश के मैदानी इलाकों में ठंड कम पड़ेगी और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी काफी घट जाएगी। कम ठंड पड़ने से कृषि पैदावार प्रभावित होगी, साथ ही आने वाले महीनों में जल संकट और बिजली की मांग में भारी इजाफा देखा जा सकता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार मौजूदा स्थिति वर्ष 2015-16 के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ सकती है। प्रशांत महासागर की इस मौसमी हलचल से वैश्विक स्तर पर बारिश का पैटर्न बदलेगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का यह प्रभाव आगे चलकर वर्ष 2027 की शुरुआती गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह बन सकता है।
