Shimla News: हिमाचल प्रदेश में 38 हजार करोड़ रुपये की फोरलेन परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को लेकर एनएचएआई के निदेशक संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत को पत्र लिखा है। पत्र में तीन मुख्य समस्याओं पर व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की गई है, जिससे परियोजनाओं में हो रही देरी को रोका जा सके।
शिमला बाईपास पर डंपिंग साइट को लेकर ग्रामीणों का विरोध
एनएचएआई ने बताया कि 28 किलोमीटर लंबे शिमला बाईपास प्रोजेक्ट में स्थानीय लोग मलबा फेंकने का विरोध कर रहे हैं। शुंगल गांव के निवासी 1.4 हेक्टेयर क्षेत्र की डंपिंग साइट के संपर्क मार्ग का इस्तेमाल नहीं होने दे रहे। इस साइट पर सुरंगों और कटिंग से निकला लगभग छह लाख घन मीटर मलबा डंप किया जाना प्रस्तावित है।
चार प्रमुख परियोजनाओं की लागत और समय सीमा प्रभावित
राज्य में कीरतपुर-मनाली, पठानकोट-मंडी, परवाणू-शिमला और शिमला-मटौर जैसी चार बड़ी फोरलेन परियोजनाएं चल रही हैं। इन्हें वर्ष 2026 से 2028 के बीच पूरा किया जाना है। स्थानीय स्तर पर मलबा डंपिंग, ड्रेजिंग और टोल बैरियर की अड़चनों से इन विशाल परियोजनाओं का बजट और समय दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
एनएचएआई ने चेतावनी दी है कि यदि ब्यास नदी से सिल्ट नहीं निकाली गई तो पंडोह-मनाली फोरलेन को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। जलस्तर बढ़ने से हाईवे बहने का जोखिम बना हुआ है। इसके साथ ही कांगड़ा के चक्की स्थित राज्य सरकार के एंट्री टैक्स बैरियर को एनएच-154 पर स्थानांतरित करने का भी आग्रह किया गया है।
