नेपाल में बाढ़ की तबाही पर कैबिनेट का बड़ा मंथन, अनियोजित बसावट पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी में सरकार

Share

- Advertisement -

Kathmandu News: नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ को केवल प्राकृतिक आपदा नहीं माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस भारी तबाही के पीछे अनियोजित बसावट और नदियों के जल अधिग्रहण क्षेत्र में प्रकृति के साथ की गई छेड़छाड़ भी मुख्य कारण है।

रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में भारी तबाही के बाद सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ भविष्य के स्थायी उपायों पर विचार शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने स्पष्ट किया कि जलधाराओं के पास अवैध निर्माण रोकने और आपदाओं से बचाव के लिए नए नियम जल्द लागू होंगे।

नदियों के कैचमेंट एरिया में अनियोजित निर्माण से बढ़ा नुकसान

कैबिनेट में स्वीकार किया गया कि नेपाल की पहचान नदियों और पर्वतों से है, लेकिन हाल के वर्षों में प्राकृतिक जलधाराओं के किनारे अव्यवस्थित बस्तियां बस गईं। अब सरकार ऐसी असुरक्षित बसावटों और अवैध ढांचों को चिन्हित कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

इंजीनियरों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान उन क्षेत्रों में हुआ है जो सीधे नदी के बहाव क्षेत्र में स्थित थे। सड़कों और पुलों के निर्माण से पहले नदी की प्राकृतिक धारा का तकनीकी अध्ययन नहीं किया गया। इसी लापरवाही के चलते कैलाश मानसरोवर मार्ग से जुड़े रसुवा और नुवाकोट में बुनियादी ढांचे पूरी तरह तबाह हो गए।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News