Riyadh News: सऊदी अरब पर हमलों में इस्तेमाल हूती विद्रोहियों की मिसाइलों में चीन निर्मित संवेदनशील कलपुर्जे मिलने का खुलासा हुआ है। एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, रॉकेट मोटर और एयरफ्रेम के विशेष हिस्से चीनी आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े पाए गए हैं। इससे सऊदी अरब और चीन के कूटनीतिक व आर्थिक संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही मिसाइलों में चीन निर्मित पुर्जों के पाए जाने के बाद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। हथियारों के प्रसार और आधुनिक सैन्य तकनीक के अवैध आवागमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। यह स्थिति सऊदी अरब और चीन के बीच हाल के वर्षों में मजबूत हुए द्विपक्षीय संबंधों पर भी प्रभाव डाल सकती है।
जांच रिपोर्ट में चीनी आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े मिले तार
युगांडा के मीडिया संस्थान ‘पीएमएल डेली’ की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन स्थित स्वतंत्र हथियार निगरानी संगठन ‘कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च’ (CAR) की जांच में सामने आया है कि हूती मिसाइलों के रॉकेट मोटर, स्थिरता बनाए रखने वाले फिन और एयरफ्रेम से जुड़े महत्वपूर्ण पुर्जे चीनी आपूर्तिकर्ताओं के हैं। ये संवेदनशील उपकरण हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भेजी गई सैन्य खेपों की जांच के दौरान बरामद किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन जहां एक तरफ सऊदी अरब का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार और अहम आर्थिक साझेदार है, वहीं दूसरी तरफ उसके औद्योगिक तंत्र से निकले उपकरण हूतियों तक पहुंचना रियाद के लिए रणनीतिक रूप से चिंताजनक है। चीन ने वर्ष 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने में भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
तकनीक का अनधिकृत प्रवाह और परीक्षण का अंदेशा
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन सैन्य पुर्जों की आपूर्ति में चीनी सरकार की सीधी या प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं मिला है। इसके बावजूद, कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के घेरे में रहने वाले सशस्त्र समूह तक इन संवेदनशील तकनीकों का पहुंचना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की खामियों को उजागर करता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यमन का संघर्ष आधुनिक सैन्य तकनीक और हथियारों के परीक्षण का मैदान बन रहा है। ड्रोन, सटीक मारक मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच चीनी मूल के पुर्जों की मौजूदगी को विशेषज्ञ सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक प्रतिष्ठानों के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की निगरानी को भी और अधिक कड़ा कर सकता है।