Beijing News: चीन ने अपने राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर सैन्य नेतृत्व में बड़ा फेरबदल किया है। केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के पहले उपाध्यक्ष झांग यूक्सिया और संयुक्त स्टाफ प्रमुख लियू झेनली को पार्टी व सेना से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद आयोग की शीर्ष कमान में अब केवल दो सक्रिय सदस्य बचे हैं।
शीर्ष कमान से अनुभवी जनरलों की छुट्टी
सरकारी मीडिया के अनुसार दोनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, गुटबाजी और पार्टी के प्रति वफादारी न रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। जनवरी में जांच शुरू होने के बाद अगस्त में उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया गया था। शी चिनफिंग के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में सात सदस्यों वाली यह संस्था अब काफी सिमट चुकी है।
निष्कासित झांग यूक्सिया वास्तविक युद्ध का अनुभव रखने वाले गिने-चुने चीनी जनरलों में से एक थे। उन्होंने 1979 के वियतनाम युद्ध और 1984 में लाओशान मोर्चे पर सैनिकों का नेतृत्व किया था। वे अमेरिका के साथ सैन्य संवाद में सक्रिय थे और 2024 में पूर्व अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से मिले थे।
2027 का लक्ष्य और ताइवान रणनीति पर असर
इन निष्कासनों से पहले चीन के दो रक्षा मंत्रियों और पूर्व उपाध्यक्ष हे वेइडोंग को भी हटाया जा चुका है। झांग शेंगमिन को पदोन्नति देकर उपाध्यक्ष बनाया गया। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब शी चिनफिंग ने 2027 में पीएलए के 100 वर्ष पूरे होने पर सेना के आधुनिकीकरण का अहम लक्ष्य रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष अधिकारियों के हटने से ताइवान को लेकर पीएलए की संयुक्त रणनीतिक योजना प्रभावित हो सकती है। जमीन, हवा और समुद्र में साझा अभियान के लिए अनुभवी कमान बेहद जरूरी मानी जाती है। हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि सेना की पूरी क्षमता का आकलन केवल नेतृत्व बदलाव से नहीं किया जा सकता।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ा टकराव का खतरा
सैन्य फेरबदल के बीच दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव बढ़ गया है। पलावान के पास चीनी कोस्ट गार्ड और फिलीपींस की नौका में टक्कर की घटना सामने आई। पीएलए के सदर्न थिएटर कमांड ने स्कारबोरो शोल के पास नौसेना और वायुसेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास भी तेज कर दिया है।
अभ्यास के दौरान चीनी कोस्ट गार्ड ने जहाजों पर नियंत्रण और उन्हें खींचने की ट्रेनिंग ली। सैन्य जानकारों के अनुसार चीन की ताकत का पैमाना केवल हमला करना नहीं है। संकट के पलों में टकराव को पूर्ण युद्ध में बदलने से रोकने की कमान क्षमता भी किसी सेना की असली परीक्षा होती है।