World News: दुनिया भर के प्रमुख शहरों में पीने के पानी की बढ़ती जरूरतों के कारण भूजल का अंधाधुंध दोहन जारी है। इससे न केवल जलस्तर तेजी से गिर रहा है, बल्कि जमीन धंसने का गंभीर संकट भी पैदा हो गया है। समुद्र का बढ़ता स्तर इस खतरे को और विकराल बना रहा है।
जकार्ता और तिआनजिन जैसे महानगरों पर डूबने का संकट
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता और चीन के तटीय शहर तिआनजिन में यह समस्या बेहद विकराल रूप ले चुकी है। जकार्ता के तटीय इलाके हर साल लगभग 10 सेंटीमीटर की दर से नीचे धंस रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तिआनजिन में समय रहते कदम न उठाए गए, तो 2120 तक भारी आबादी को विस्थापित होना पड़ेगा।
सैन डिएगो से लेकर ईरान के प्रमुख शहरों तक जमीन के भीतर से पानी तेजी से निकाला जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार जमीन के भीतर भूजल एक गुब्बारे की तरह काम करता है। अत्यधिक निकासी से यह गुब्बारा पिचकने लगता है और जमीन धंसने लगती है। 1920 से 1960 के बीच कई इलाकों में जमीन दो मीटर तक धंस चुकी है।
जापान के अध्ययन में फाल्टलाइनों से जलस्तर सुधरने के संकेत
विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ जेस्सी कीयर्स के अध्ययन के अनुसार भूजल को पुराने स्तर पर लौटाना संभव है। आमतौर पर भूकंप की वजह मानी जाने वाली फाल्टलाइनें पानी के रिचार्ज में मददगार साबित हो सकती हैं। जापान के 44 कुओं के इनसार तकनीक आधारित अध्ययन में पाया गया कि 500 मीटर गहराई तक गिरा जलस्तर 1985 तक वापस लौट आया था।
अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि जिन शहरों के नीचे फाल्टलाइनें मौजूद थीं, वहां प्राकृतिक रूप से पानी काफी तेजी से नीचे पहुंचा। हालांकि ये दरारें पानी के नीचे चले जाने का मार्ग भी बनती हैं, लेकिन उचित प्रबंधन से ये भूजल संरक्षण में संजीवनी साबित हो सकती हैं।