Brasilia News: ब्राजील में राष्ट्रपति पद के चुनाव के दूसरे दौर में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज कर ली है। चुनाव आयोग के अनुसार, वोटों की गिनती पूरी होने के बाद 80 वर्षीय लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 44 लाख से अधिक वोटों (कुल वोटों के 51.8%) के अंतर से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही उनके चौथी बार देश के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया है।
रविवार को लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतंत्र में हुए इस कड़े मुकाबले में लूला को 51.76 प्रतिशत वोट मिले, जबकि जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट हासिल हुए। यह नतीजे चुनावी सर्वे के अनुमानों के बिल्कुल उलट रहे, जिनमें बोल्सोनारो को बढ़त मिलने की संभावना जताई गई थी। मतदान के दौरान समय को आखिरी मौके पर दो घंटे बढ़ाने के कारण मतदान केंद्रों पर काफी अफरा-तफरी का माहौल भी देखने को मिला।
लैटिन अमेरिका की राजनीति में वामपंथ की वापसी
लूला की यह जीत लैटिन अमेरिका में चल रहे उस राजनीतिक रुझान के विपरीत है, जिसमें ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी उम्मीदवार लगातार सफलता हासिल कर रहे थे। इस जीत के बाद अब लैटिन अमेरिका के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश—मैक्सिको और ब्राजील—दोनों में वामपंथी (लेफ्ट-ऑफ-सेंटर) विचारधारा के नेता सत्ता में हैं।
चार दशक से सक्रिय हैं राजनीति में
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा पिछले चार दशकों से ब्राजील की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। साल 1989 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले लूला जनवरी 2003 से दिसंबर 2010 तक लगातार दो कार्यकाल तक देश के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद जनवरी 2023 में वह तीसरी बार इस पद पर चुने गए। उनका नया और चौथा कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेंगी चुनौतियां
पूर्व ट्रेड यूनियन नेता लूला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति के मुखर आलोचक रहे हैं। इसके विपरीत, उनके प्रतिद्वंद्वी बोल्सोनारो को ट्रंप का करीबी माना जाता था। हालांकि ट्रंप ने खुलकर बोल्सोनारो का समर्थन तो नहीं किया था, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट संकेत जरूर दिए थे कि वह लूला को सत्ता में नहीं देखना चाहते हैं। ऐसे में जनवरी 2027 से शुरू होने वाले अपने इस नए कार्यकाल के दौरान लूला को अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंधों समेत कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।