मसालों, सूखे मेवों और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में रंग मिलाने पर रोक, FSDA ने जारी किए निर्देश

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District News: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मसालों, सूखे मेवों और रोजमर्रा की खाद्य सामग्रियों में किसी भी तरह का रंग मिलाने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग ने जिले के सभी 4400 लाइसेंसी और 26000 पंजीकृत दुकानदारों के लिए आदेश जारी करते हुए गुणवत्ता से समझौता करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

खाद्य पदार्थों को अधिक आकर्षक दिखाने के लिए उनमें कृत्रिम रंग मिलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने इस संबंध में जिले को औपचारिक आदेश पत्र जारी किया है। नए निर्देशों के अनुसार, अब मसालों, सूखे मेवों और रोजमर्रा के कई जरूरी खाद्य उत्पादों में किसी भी प्रकार का रंग मिलाने की अनुमति नहीं होगी।

एफएसडीए द्वारा जारी सूची के अनुसार पिसी हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर से लेकर अनाज, दालें, आटा, सूजी और ब्रेड जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं में रंग का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। जिले में वर्तमान में 4,400 लाइसेंसी और 26,000 पंजीकृत दुकानदार हैं। इन सभी विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश जैसे सूखे मेवों में किसी भी प्रकार का रंग न मिलाएं। इसके अलावा शिशु आहार (बेबी फूड) और शिशुओं के लिए आने वाले पैकेज्ड दूध में भी रंग मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इन खाद्य सामग्रियों में भी रंग का उपयोग पूरी तरह वर्जित

विभाग द्वारा जारी सूची में पीने का पानी, प्राकृतिक फलों का रस, चाय की पत्ती, कॉफी, शहद, गुड़, खाद्य तेल और वसा भी शामिल हैं। इन सभी उत्पादों में किसी भी तरह के बाहरी रंग का मिश्रण नहीं किया जा सकता। बाजार में अक्सर बिक्री बढ़ाने और उत्पादों को चमकदार दिखाने के लिए रंगों की मिलावट की जाती है। विभाग ने आगाह किया है कि मसालों और मेवों में अस्वाभाविक चमक या गहरा रंग दिखने पर उपभोक्ताओं को सतर्कता बरतनी चाहिए। हालांकि, केवल दिखावट के आधार पर मिलावट साबित नहीं होती, इसके लिए विभाग से जांच कराई जा सकती है।

उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता और जांच की व्यवस्था

खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पैकेटबंद सामान खरीदते समय सामग्री विवरण, निर्माण तिथि (मैन्युफैक्चरिंग डेट) और उपयोग की अंतिम तिथि (एक्सपायरी डेट) की जांच करना आवश्यक है। खुले खाद्य पदार्थों की खरीद में भी सावधानी बरतने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिलावट का संदेह होने पर उपभोक्ता सीधे खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित कर सकते हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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