गन्ने के दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग, उत्पादन लागत और चीनी की कीमतों से गरमाया मुद्दा

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Meerut News: चीनी के बढ़ते भाव और गन्ने की उत्पादन लागत में प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये के इजाफे के बीच किसान संगठनों ने आगामी सत्र में गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई है। वहीं दूसरी ओर, चीनी मिलें भी पेराई खर्च में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 5,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रही हैं।

चीनी के बढ़े हुए दाम और गन्ने की खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए उत्तर प्रदेश के किसान इस पेराई सत्र में गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की अपेक्षा कर रहे हैं। किसान संगठनों के अनुसार, खाद, बीज, जुताई और मजदूरी में वृद्धि के चलते प्रति हेक्टेयर गन्ने की लागत में लगभग 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

दूसरी ओर, चीनी मिलों का कहना है कि पेराई खर्च बढ़ने के कारण मौजूदा न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) नाकाफी है। मिलें केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल (50 रुपये प्रति किलो) से अधिक करने और सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथनाल की दरों में वृद्धि की मांग कर रही हैं।

एथनाल नीति और चीनी उत्पादन पर सरकारी निर्देश

केंद्र सरकार ने इस बार घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए मिलों को सी-हैवी शीरा आधारित उत्पादन पर जोर देने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के चलते मिलें बी-हैवी शीरे या सीधे गन्ने के रस से एथनाल का उत्पादन नहीं कर सकेंगी।

वर्तमान में सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथनाल का भाव करीब 57 रुपये प्रति लीटर है। मिल प्रबंधन का कहना है कि एथनाल उत्पादन सीमित होने और पेराई खर्च बढ़ने के कारण उनके वित्तीय संतुलन पर दबाव बन रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम पैदावार तथा बेमौसम बारिश से रिकवरी दर प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

लागत में 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ गन्ने की फसल है। बीते पेराई सत्र में मिलों से बिकने वाली चीनी के दाम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर करीब 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। चीनी की इन बढ़ी कीमतों ने किसानों को गन्ने का वाजिब मूल्य मांगने का आधार दिया है।

लागत के आंकड़ों के अनुसार, गन्ने की पौध फसल में भूमि तैयारी, बीज, खाद और निराई-गुड़ाई में अधिक खर्च होता है, जबकि पेड़ी फसल में यह लागत कुछ कम रहती है। दोनों फसलों का औसत मिलाकर इस सत्र में खेती की लागत 2,22,520 रुपये प्रति हेक्टेयर आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की औसत लागत 2,12,043 रुपये से करीब 10,477 रुपये अधिक है।

उल्लेखनीय है कि पिछले पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी, जिसके बाद अगेती प्रजाति का भाव 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति का भाव 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था।

किसान संगठनों का रुख

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि 400 रुपये प्रति क्विंटल का मौजूदा भाव किसानों की लागत के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि खुले बाजार में चीनी के दाम लगातार मजबूत बने हुए हैं, इसलिए सरकार को गन्ने का भाव कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना चाहिए।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि लागत में लगातार इजाफा हो रहा है और किसान अब अपनी उपज को घाटे में बेचने के लिए तैयार नहीं हैं।

चीनी उत्पादन लागत पर मिलों का गणित

बरकातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष के अनुसार, एक क्विंटल चीनी तैयार करने में औसतन नौ क्विंटल गन्ने की खपत होती है। 400 रुपये प्रति क्विंटल के वर्तमान भाव के अनुसार नौ क्विंटल गन्ने का मूल्य ही 3,600 रुपये हो जाता है।

इसके अतिरिक्त, प्रति क्विंटल गन्ने पर लगभग 20 रुपये ढुलाई भाड़ा और 50 से 55 रुपये कर्मचारियों के वेतन, पेराई और प्रसंस्करण पर खर्च होते हैं। इस प्रकार एक क्विंटल चीनी तैयार करने की कुल लागत 4,200 से 4,300 रुपये तक पहुंच जाती है।

उप-उत्पादों के संदर्भ में, एक क्विंटल गन्ने की पेराई से औसतन 10 से 11 किलोग्राम चीनी, करीब 5 किलोग्राम सी-हैवी शीरा और इतनी ही मात्रा में खोई प्राप्त होती है। शीरे का खुला बाजार भाव करीब 1,300 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरकार लेवी कोटे के तहत मिलों से 30 प्रतिशत शीरा 152 रुपये प्रति क्विंटल की नियंत्रित दर पर लेती है।

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