Malkangiri News: ओडिशा के मलकानगिरि जिले के मोटू इलाके में आंध्र प्रदेश की सीमा से चार साल के एक रॉयल बंगाल टाइगर के दाखिल होने के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने सैटेलाइट और वीएचएफ ट्रैकिंग प्रणाली सक्रिय कर दी है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जंगल जाने पर रोक लगाते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं।
ओडिशा के मलकानगिरि जिले के सीमावर्ती मोटू क्षेत्र में एक रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी दर्ज की गई है। करीब चार साल का यह बाघ पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के पापिकोंडालू वन क्षेत्र से सीमा पार कर ओडिशा में दाखिल हुआ है। बाघ के इलाके में विचरण की पुष्टि होते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल बन गया है। वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में सघन तलाशी और निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।
रेडियो कॉलर और सैटेलाइट से बाघ की 24 घंटे ट्रैकिंग
मलकानगिरि के मंडलीय वन अधिकारी (डीएफओ) साई किरण डीएन ने बताया कि बाघ के गले में पहले से रेडियो कॉलर लगा हुआ है। इसकी मदद से वन विभाग बाघ की सटीक लोकेशन और आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बाघ की ट्रैकिंग के लिए सैटेलाइट तकनीक के साथ-साथ वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (वीएचएफ) आधारित सिस्टम का भी उपयोग किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश के वन विभाग से सूचना साझा होने के बाद दोनों राज्यों की सीमा से लगे जंगलों में गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि बाघ की सुरक्षित निगरानी की जा सके।
गांवों में अलर्ट जारी, जंगल जाने पर रोक
बाघ की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए वन प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों में सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पीए सिस्टम) के जरिए चेतावनी जारी की है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे बिना किसी अनिवार्य कार्य के जंगलों की ओर न जाएं और फिलहाल अपने गांवों की सीमा के भीतर ही रहें। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या बाघ दिखने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करने को कहा है। साथ ही, ग्रामीणों से बाघ को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाने और बचाव कार्य में सहयोग करने का आग्रह किया गया है।
आपात स्थिति के लिए क्विक रिस्पांस टीमें तैनात
वन विभाग ने किसी भी संभावित खतरे या आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए मौके पर क्विक रिस्पांस टीमों (क्यूआरटी) की तैनाती की है। ये टीमें सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर गश्त कर रही हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, विभाग की पहली प्राथमिकता बाघ की सटीक गतिविधियों को ट्रैक करना और ग्रामीणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रकार के मानव-वन्यजीव संघर्ष या अफरा-तफरी की स्थिति को समय रहते रोका जा सके।