उत्तराखंड के कैंची धाम की स्थापना से जुड़ा है 20 साल पुराना रहस्य, जानिए बाबा नीम करोली महाराज के चमत्कार की पूरी कहानी

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Nainital News: उत्तराखंड की हसीन वादियों में स्थित कैंची धाम आज विश्व भर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। बेहद कम लोग जानते हैं कि इस दिव्य आश्रम की स्थापना एक अलौकिक और रहस्यमयी घटना से जुड़ी है। साल 1942 में शुरू हुई यह कहानी बाबा नीम करोली महाराज के अद्भुत चमत्कार को बयां करती है।

अंधेरी रात में पूर्णानंद तिवारी को मिले थे कंबल वाले संत

साल 1942 की एक शाम नैनीताल अदालत से अपने कागजात समेटकर पूर्णानंद तिवारी अकेले गांव लौट रहे थे। सुनसान रास्ते में ‘खुफिया डांड’ नामक डरावने इलाके की पुलिया पर उन्हें एक विशालकाय शख्स कंबल ओढ़े दिखा। तिवारी जी सहम गए, तभी उस संत ने उनका नाम लेकर प्रेमपूर्वक पुकारा, जिससे उनका सारा डर तुरंत दूर हो गया।

तिवारी जी ने आगे बढ़कर इस सिद्ध संत के चरण स्पर्श किए। संत ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आगे उन्हें साधन मिल जाएगा और वह बात सच साबित हुई। जब तिवारी जी ने दोबारा मिलने का समय पूछा, तो संत ने बीस साल बाद दर्शन देने की भविष्यवाणी की। यह वही मुलाकात थी जिसने आगे चलकर कैंची धाम की नींव रखी।

ठीक बीस साल बाद 1962 में सच साबित हुई भविष्यवाणी

भविष्यवाणी के ठीक दो दशक बाद, 25 मई 1962 को बाबा नीम करोली महाराज रानीखेत से नैनीताल लौटते समय कैंची गांव पहुंचे। उन्होंने पूर्णानंद तिवारी को बुलवाया। तिवारी जी उन्हें देखते ही पहचान गए। इसके बाद महाराज जी क्षिप्रा नदी पार कर उस घने जंगल में पहुंचे, जहां कभी संत सोमवारी बाबा और प्रेमी बाबा तपस्या करते थे।

महाराज जी ने नदी किनारे एक पवित्र शिला पर बैठकर पुरानी यज्ञशाला की जगह चबूतरा बनवाया। आगे चलकर इसी स्थान पर भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ। बिना किसी पेशेवर आर्किटेक्ट या नक्शे के, केवल महाराज जी के दिव्य निर्देशों पर अद्वैत आश्रम, वैष्णवी देवी मंदिर, शिव परिवार और लक्ष्मी नारायण मंदिर का विस्तार होता चला गया।

15 जून को ही क्यों स्थापित हुई महाराज जी की पावन प्रतिमा

बाबा नीम करोली महाराज ने पहले ही कह दिया था कि इस स्थान की ख्याति पूरी दुनिया में फैलेगी। महाराज जी के महाप्रयाण के बाद श्री सिद्धि मां के मार्गदर्शन में भव्य समाधि मंदिर बना। बाबा ने जीवनकाल में ही 15 जून की तारीख उत्सव के लिए चुनी थी, इसलिए साल 1976 में इसी दिन उनकी प्रतिमा स्थापित हुई।

देश की राजधानी दिल्ली से कैंची धाम पहुंचना बेहद सुगम है। श्रद्धालु आनंद विहार या नई दिल्ली से काठगोदाम तक ट्रेन ले सकते हैं। काठगोदाम से धाम की दूरी लगभग 38 किलोमीटर है, जहां से टैक्सी आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा कश्मीरी गेट से बस या निजी वाहन से 7-8 घंटे में पहुंचा जा सकता है।

Desh Raj
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