पीएमएफएमई योजना के तहत 2 लाख से अधिक ऋण मंजूर, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को मिली नई रफ्तार

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Delhi News: केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई) योजना ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। इस योजना के क्रेडिट लिंक घटक के तहत 2 लाख से अधिक आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है।

कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छोटे उत्पादकों और गांवों में कार्यरत उद्यमों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के माध्यम से लंबे समय से औपचारिक वित्त और संस्थागत सहायता से दूर रहे सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वित्तीय मदद और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

पीएमएफएमई योजना से मिली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

योजना के तहत पहली मंजूरी पाने वाले जमनालाल पाटीदार ने 10 लाख रुपये के निवेश से धनिया प्रसंस्करण इकाई की शुरुआत की थी, जिससे आज 5 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। वहीं 2 लाखवीं मंजूरी रांची के इंदरजीत सिंह को बेकरी उद्योग स्थापित करने के लिए दी गई है।

इस योजना में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। कुल मंजूरियों में से लगभग 44 प्रतिशत लाभ महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मिला है। इसके अलावा 4 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह सदस्यों को सीड कैपिटल प्रदान की गई है। योजना से अब तक 20,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है।

स्थानीय कौशल को मिला वैश्विक मंच और मान्यता

योजना के माध्यम से 75,000 से अधिक इकाइयां उद्यम पंजीकरण, एफएसएसएआई और जीएसटी अनुपालन के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनी हैं। इस पहल से लगभग 6 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे स्थानीय फसलों को ब्रांडेड उत्पाद और घरेलू कौशल को स्थायी रोजगार में बदलने में मदद मिल रही है।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान के अनुसार, योजना का अगला चरण ऋण वितरण को तेज करने, बेहतर तकनीक, पैकेजिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच प्रदान करने पर केंद्रित होगा। सरकार मंजूरी के बाद भी उद्यमियों को निरंतर सहयोग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Desh Raj
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