National News: राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने अपने पारंपरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए इसमें साइबर सुरक्षा को भी शामिल कर लिया है। इसी पहल के तहत महाराष्ट्र निदेशालय के 30 एनसीसी कैडेट्स ने पहली बार ‘साइबर डिफेंडर कोर्स’ सफलता पूर्वक पूरा किया है।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT), छत्रपति संभाजीनगर के सहयोग से किया गया। इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तेजी से बदलते डिजिटल खतरों और साइबर सुरक्षा परिदृश्य से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था।
डिजिटल फॉरेंसिक और नेटवर्क सुरक्षा का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों को खोजना, नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत करना और साइबर हमलों पर त्वरित प्रतिक्रिया देना सिखाया गया। इसके अलावा कोर्स में साइबर रेजिलिएंस और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे आधुनिक विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया।
कैडेट्स ने सीखा कि साइबर हमलों की जांच कैसे की जाती है, डिजिटल सबूत कैसे जुटाए जाते हैं और नुकसान को कम कैसे किया जाए। एनसीसी अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ते डिजिटल खतरों को देखते हुए केवल पारंपरिक सैन्य और नेतृत्व प्रशिक्षण ही अब युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं है।
युवाओं के लिए खुलेंगे एथिकल हैकिंग और आईटी क्षेत्र में करियर के रास्ते
यह नई पहल एनसीसी के मौजूदा ड्रोन प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों को भी तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगी। इस प्रशिक्षण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कैडेट्स के लिए एथिकल हैकिंग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल जांच जैसे क्षेत्रों में करियर के नए दरवाजे खुलेंगे।
आज के समय में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में इन स्किल्स की भारी मांग है। यह कोर्स सशस्त्र बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और टेक कंपनियों में रोजगार पाने में मददगार साबित होगा। प्रशिक्षित युवा देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।