Sirmaur News: हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में रविवार का दिन बेहद ऐतिहासिक बन गया। राज्य के किसी चिड़ियाघर में पहली बार रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा पहुंचा है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान से यह नर-मादा जोड़ा 1900 किलोमीटर का सफर पूरा करके श्री रेणुका जी चिड़ियाघर पहुंच चुका है।
कड़े सुरक्षा मानकों के बीच नागपुर से रेणुका जी लाया गया जोड़ा
टाइगर के इस जोड़े में मादा की उम्र तीन वर्ष और नर की आयु पांच वर्ष है। वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम ने शुक्रवार शाम नागपुर से सफर शुरू किया था। नेशनल जू अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए विशेष खुले वाहन में दोनों को सुरक्षित लाया गया।
करोड़ों की लागत से 4500 वर्ग मीटर में बना आधुनिक एनक्लोजर
वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद ने पुष्टि की कि पूरी यात्रा सुरक्षा मानकों के तहत पूरी हुई। श्री रेणुका जी चिड़ियाघर में इस जोड़े के लिए करीब 1.67 करोड़ रुपये की लागत से 4500 वर्ग मीटर का आधुनिक एनक्लोजर तैयार किया गया है, जिसमें नाइट शेल्टर और नर्सिंग की सुविधाएं हैं।
सफारी में 1975 से शेरों का इतिहास और सिरमौर में बाघों की मौजूदगी
रेणुका जी सफारी में वर्ष 1975 में जूनागढ़ से शेरों का जोड़ा आया था और इनकी संख्या 29 तक पहुंची थी, लेकिन इनब्रीडिंग के चलते 2015 में आखिरी शेर की मौत हो गई। वहीं सिरमौर के सिंबलबाड़ा नेशनल पार्क और पांवटा साहिब के जंगलों में भी कैमरा ट्रैप के जरिए पहले टाइगर की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है।