पैरा एथलीट निषाद कुमार को अंतरराष्ट्रीय पदकों के बाद भी सरकारी नौकरी का इंतजार, परिजनों ने उठाई मांग

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Una News: अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन करने वाले पैरा एथलीट निषाद कुमार को आज भी पक्की सरकारी नौकरी का इंतजार है। पैरा ओलंपिक, पैरा वर्ल्ड एथलेटिक्स और पैरा एशियन गेम्स में कई पदक जीतने के बाद भी उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल पाया है।

हाल ही में जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में निषाद ने दो स्वर्ण पदक जीतकर देश और हिमाचल प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उनके परिजन खेल मंत्री से लेकर राज्य सरकार तक कई बार नौकरी की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

जिला खेल अधिकारी पद पर नियुक्ति की मांग

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को केवल नकद पुरस्कार देने के बजाय उनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए। सरकार को निषाद कुमार जैसे उम्दा खिलाड़ियों को युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में जिला खेल अधिकारी जैसे पदों पर तैनात करने पर विचार करना चाहिए।

अगर विश्वस्तरीय एथलीट प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण देंगे, तो हिमाचल से कई नए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हो सकेंगे। जिला ऊना ने भारतीय हॉकी को ओलंपियन स्वर्गीय चरणजीत सिंह और दीपक ठाकुर जैसे कई नायाब हीरे दिए हैं। चरणजीत सिंह की विरासत को पहचान देने के लिए किसी मैदान का नाम उनके नाम पर रखना अपेक्षित है।

खेलों से नशा मुक्ति अभियान को मिलेगी ताकत

हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में नशे के खिलाफ चिट्टा मुक्त अभियान चला रही है। इस अभियान को सफल बनाने में खेलों की भूमिका सबसे अहम साबित हो सकती है। युवाओं को खेल मैदानों और ट्रेनिंग सेंटरों से जोड़कर उनकी ऊर्जा को सही दिशा दी जा सकती है।

इसके लिए जरूरी है कि निषाद कुमार जैसे सफल एथलीटों को सम्मान देकर युवाओं के लिए रोल मॉडल बनाया जाए। इससे न केवल युवाओं का भविष्य संवरेगा, बल्कि नशा मुक्त हिमाचल के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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