Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे 154 पर पधर उपमंडल के तहत आने वाले कोटरोपी में हाल ही में बनाई गई नई सड़क अचानक धंस गई है। सड़क धंसने से इस मुख्य हाईवे पर यातायात प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।
प्रशासन ने मौके का लिया जायजा और दी सलाह
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पधर सुरजीत सिंह ठाकुर ने प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि दिन के समय हाईवे पर वाहनों की आवाजाही जारी रखी गई है, लेकिन रात के समय सुरक्षा कारणों से यातायात को पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
एसडीएम सुरजीत ठाकुर ने चालकों और यात्रियों से अपील की है कि वे इस मार्ग पर कोई भी जोखिम न उठाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है जो चालकों को डायवर्जन की जानकारी दे रहा है।
पधर से वाया डायना पार्क-झटिंगरी मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह सुचारू है, जहां से चालक सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं। एसडीएम ने बताया कि एनएचएआई और विशेषज्ञों की टीमें जल्द ही मौके पर पहुंचकर भू-धंसाव की समस्या का स्थाई समाधान निकालने की कोशिश करेंगी ताकि हाईवे को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
मंडी पुलिस ने जारी की नई ट्रैफिक एडवाइजरी
मंडी पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर बताया कि कोटरोपी में सड़क धंसने की वजह से यातायात को डायना पार्क-घाटासनी लिंक रोड पर डायवर्ट किया गया था। हालांकि, लैंडस्लाइड के कारण यह लिंक रोड भी बुधवार को बंद हो गया है। इसके अतिरिक्त मंडी-कटौला-कुल्लू मार्ग भी लैंडस्लाइड से ठप पड़ा है।

यात्री किसी भी आपात स्थिति या रास्ते की अद्यतन स्थिति जानने के लिए मंडी पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 01905-223374 पर संपर्क कर सकते हैं। पुलिस लगातार सोशल मीडिया और मीडिया माध्यमों से लोगों को रास्ते के ताजा अपडेट दे रही है ताकि यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े।
14 वर्ष पहले कोटरोपी हादसे में गई थी 48 की जान
अगस्त 2014 में कोटरोपी की यह पहाड़ी भीषण भूस्खलन के कारण पूरी तरह ढह गई थी। इस भयावह त्रासदी में एचआरटीसी की दो बसें मलबे में समा गई थीं, जिसमें 48 यात्रियों की दर्दनाक मौत हुई थी। तीन यात्रियों के शव आज तक बरामद नहीं हो सके, जो राज्य के इतिहास का भयानक हादसा था।
उस ऐतिहासिक हादसे के बाद से कोटरोपी का यह पहाड़ लगातार लोगों को डराता रहा है। अब 12 साल बाद एक बार फिर इसी जगह पर सड़क धंसने की घटना सामने आने से स्थानीय निवासियों और राहगीरों के बीच पुराना डर फिर से लौट आया है और लोग दहशत महसूस कर रहे हैं।