Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित रक्छम-छितकुल वाइल्डलाइफ सेंचुरी में करीब छह दशक बाद बेहद दुर्लभ घोस्ट ऑर्किड फिर दिखाई दिया है। वन विभाग और वन्यजीव टीम ने सर्वे के दौरान इसके चार पौधे कैमरे में रिकॉर्ड किए हैं। इस खोज को राज्य की वनस्पति संपदा और जैव विविधता के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
प्राकृतिक आवास में रिकॉर्ड किए गए चार पौधे
वन खंड अधिकारी संतोष कुमार ठाकुर और वन मित्र अल्पना नेगी के साथ टीम सदस्यों ने इस दुर्लभ पौधे की तस्वीरें खींची हैं। टीम ने भविष्य के साइंटिफिक रिसर्च के लिए जरूरी फील्ड डेटा भी जुटाया है। सर्वेक्षण में केवल चार पौधे मिलने से यह साफ है कि यह प्रजाति पश्चिमी हिमालय में कितनी दुर्लभ और संकटग्रस्त है।
साल 1921 में पहली बार मिला था इसका प्रमाण
प्रसिद्ध टैक्सोनोमिस्ट डॉ. गुरिंदरजीत सिंह गोराया के मुताबिक यह राज्य के सबसे दुर्लभ पौधों में शामिल है। इसका पहला आधिकारिक रिकॉर्ड वर्ष 1921 में शिमला के फागू से मिला था, जिसे वैज्ञानिक हेनरी कोलेट ने दर्ज किया था। इसके बाद 1959 में डॉ. राव ने इसे खोजा था, लेकिन लंबे समय से इसके पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
दस से बारह दिन खिलने के बाद गायब हो जाता है फूल
बॉटनिकल एक्सपर्ट डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा ने बताया कि एपिपोगियम जीनस की दुनियाभर में लगभग आठ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से तीन भारत में मौजूद हैं। यह रहस्यमयी पौधा अनुकूल मौसम आने पर ही जमीन से बाहर निकलता है। इसके फूल महज 10 से 12 दिन खिलने के बाद प्राकृतिक रूप से फिर गायब हो जाते हैं।