Delhi News: भारत के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में द लॉरेंस स्कूल, सनावर का नाम बेहद खास है। हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में स्थित यह स्कूल देश का सबसे पुराना सह-शिक्षा बोर्डिंग स्कूल है। लगभग 179 साल पहले शुरू हुआ यह संस्थान आज भी अपनी समृद्ध परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
लड़कों और लड़कियों को समान अवसर देने की शुरुआत
कसौली के पास स्थित इस स्कूल की स्थापना 15 अप्रैल 1847 को हुई थी। स्थापना के समय से ही यहां सह-शिक्षा प्रणाली लागू की गई थी। इसके पहले बैच में 14 बच्चे थे, जिनमें 7 लड़के और 7 लड़कियां शामिल थीं। उस दौर में यह व्यवस्था बहुत ही अनोखी और प्रगतिशील मानी जाती थी।
यह स्कूल समुद्र तल से करीब 1,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। लगभग 130 एकड़ में फैले परिसर के चारों तरफ देवदार और चीड़ के घने जंगल हैं। यहां का शांत वातावरण बच्चों के अध्ययन, अनुशासन और समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।
ब्रिटिश काल में स्थापना और नामचीन हस्तियों का जुड़ाव
इस संस्थान की शुरुआत सर हेनरी लॉरेंस और लेडी गोनोरिया लॉरेंस ने ब्रिटिश सैनिकों के बच्चों के लिए की थी। समय के साथ यह देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में शामिल हो गया। सीबीएसई से संबद्ध इस स्कूल में पढ़ाई के साथ खेल, कला और एडवेंचर पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
स्कूल के पूर्व छात्रों में भूटान की महारानी जेत्सुन पेमा, अभिनेता संजय दत्त, मेनका गांधी और परमवीर चक्र विजेता अरुण खेतरपाल शामिल हैं। संस्थान का मोटो ‘नेवर गिव इन’ है। यह आदर्श वाक्य विद्यार्थियों को हर कठिन परिस्थिति में निडर होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।