Mumbai News: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में एक बड़ी रैली बुलाई है। इस रैली के लिए विपक्षी दलों ने आपसी मतभेद भुलाकर बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है। शिवसेना (यूबीटी) और मनसे की इस संयुक्त पहल से राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मौजूदगी से आंदोलन को मिली नई ताकत
कॉकरोच जनता पार्टी के चर्चा में आने पर राजनीतिक हलकों में संशय का माहौल था। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की उपस्थिति ने छात्रों की आवाज को मजबूती दी। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में तेजी से फैल चुका है, जो सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बन गया है।
हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र में दलबदल की राजनीति छाई रही। नीट पेपर लीक और अल नीनो से किसानों की समस्याएं जैसे बड़े मुद्दे कमजोर पड़ गए। सरकार ने सत्र से ठीक पहले 36,585 करोड़ रुपये की कर्ज माफी का ऐलान किया था। पेपर लीक मामले में अब तक कम से कम आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
क्षेत्रीय दलों का पुनरुत्थान सरकार के लिए बढ़ा सकता है मुश्किलें
रविवार को होने वाली यह रैली महाराष्ट्र के क्षेत्रीय दलों को नई दिशा दे सकती है। शिंदे गुट द्वारा शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसदों को पाले में करने के बाद ठाकरे बंधुओं की यह रैली काफी अहम मानी जा रही है। इस रैली के जरिए दोनों भाई एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि रैली में किसी पार्टी का झंडा नहीं फहरेगा, बल्कि केवल राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग होगा। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस सहित बीजेपी नेताओं को भी इसमें आमंत्रित किया है। वहीं राज ठाकरे ने छात्रों पर पुलिस बर्बरता की निंदा करते हुए सख्त चेतावनी दी कि छात्रों को छूने पर महाराष्ट्र में ताकत दिखाई जाएगी।
