Shimla News: हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। नाबार्ड के सहयोग से प्रदेश के तीन पारंपरिक उत्पादों रणसिंघा, हस्तनिर्मित गलीचा और काष्ठ नक्काशी शिल्प को आधिकारिक भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग का प्रमाणपत्र दिया गया है।
लोक भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शिल्पकार समुदायों के प्रतिनिधियों को यह प्रमाणपत्र सौंपे। इस मान्यता के बाद पारंपरिक देव वाद्य यंत्र रणसिंघा, पहाड़ी डिजाइन वाले कालीन और सदियों पुरानी लकड़ी की नक्काशी कला को दुनिया भर में कानूनी संरक्षण मिलेगा।
कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ और नाबार्ड करेगा ब्रांडिंग
जीआई टैग मिलने से अब कोई भी इन उत्पादों के नाम पर नकली सामान नहीं बेच सकेगा। इससे बिचौलियों का असर खत्म होगा और बुनकरों को बेहतर दाम मिलेंगे। नाबार्ड हिमाचल के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने कहा कि संस्था अब इनके मजबूत ब्रांडिंग और मार्केट लिंकेज पर काम करेगी।