Shimla News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर अब गाज गिरने वाली है। जिन कर्मचारियों ने कर्ज के मामलों में जमानतदार या गारंटर की भूमिका निभाई थी, अब उनसे ही बकाया राशि की रिकवरी की जाएगी। हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के पत्र के बाद स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
30 कर्मचारियों पर लटकी रिकवरी की तलवार
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी जिला उपनिदेशकों और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों की सूची ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग अधिकारियों यानी डीडीओ को तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भर में लगभग 30 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी इस कार्रवाई के दायरे में आ रहे हैं, जिनसे अब वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी।
निगम ने 15 मई को भेजे अपने पत्र में उन कर्मचारियों का पूरा ब्योरा साझा किया था, जिन्होंने ऋण के मामलों में गारंटी दी थी। इस संबंध में विभाग द्वारा पहले भी दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब डीडीओ को सूची भेजकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी विभाग खुद सीधे तौर पर करेगा।
दिव्यांगजनों के लिए रियायती गृह ऋण योजना
इस पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग को एक अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। विभाग को दिव्यांगजनों के लिए चल रही गृह ऋण योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश मिले हैं। यह योजना राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से चलाई जा रही है, जिसके तहत पात्र लोगों को 50 लाख रुपये तक का होम लोन बहुत ही रियायती ब्याज दर पर प्रदान किया जाता है।
इस योजना में 50 हजार रुपये तक के लोन पर केवल 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा। वहीं 50 हजार से 5 लाख रुपये तक के लोन पर 6 प्रतिशत और 5 लाख से 50 लाख रुपये तक 7 प्रतिशत ब्याज तय है। कर्ज चुकाने के लिए अधिकतम 10 साल का समय दिया गया है, जिसे विशेष परिस्थितियों में आगे बढ़ाया भी जा सकता है। शिक्षा विभाग अब इस कल्याणकारी योजना का प्रसार करेगा।