Leh News: सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने 18 से 20 अगस्त तक ‘प्रोजेक्ट योजक’ का तीन दिवसीय दौरा किया। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर बन रहे रणनीतिक निम्मू-पदम-दारचा मार्ग और शिंकुन ला टनल के निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। यह रणनीतिक प्रोजेक्ट सेना और नागरिकों दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यह समीक्षा देश के सबसे दुर्गम हिमालयी इलाकों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने पर केंद्रित थी। निम्मू-पदम-दारचा मार्ग लद्दाख में निम्मू को जंस्कार घाटी के पदम और हिमाचल प्रदेश के दारचा से सीधे जोड़ता है। यह नया संपर्क मार्ग लद्दाख तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित और वैकल्पिक रणनीतिक कॉरिडोर उपलब्ध कराता है।
सामरिक दृष्टि से यह अतिरिक्त रूट सैन्य रसद और सुरक्षा बलों की तेज आवाजाही के लिए बेहद अहम है। कठिन मौसम में ऊंचाई पर तैनात जवानों तक जरूरी रसद पहुंचाने में इससे मदद मिलेगी। इससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता खत्म होगी और आपदा या आपातकालीन समय में सेना का रिस्पांस टाइम भी काफी बेहतर होगा।
इस प्रोजेक्ट से लद्दाख और हिमाचल के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों का जीवन भी आसान बनेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बाजार और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुगम होगी। साथ ही लंबे समय से कटे रहने वाले इन इलाकों में पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नया बढ़ावा मिलेगा।
समीक्षा के दौरान शिंकुन ला टनल के काम पर विशेष जोर दिया गया। यह 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब सुरंग लद्दाख के जंस्कार और हिमाचल की लाहौल घाटी के बीच लगभग 15,800 फीट की ऊंचाई पर बन रही है। भारी बर्फबारी के बावजूद यह टनल पूरे साल बिना रुकावट सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करेगी।
माइनस तापमान, कम ऑक्सीजन और बेहद चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बीआरओ की टीमें यहां दिन-रात काम कर रही हैं। ‘प्रोजेक्ट योजक’ के तहत दूर-दराज सीमावर्ती क्षेत्रों में आधुनिक पुल, सुरंगें और सड़कें बनाई जा रही हैं। डीजीबीआर ने इस कठिन मिशन में जुटे कर्मयोगियों के अथक प्रयासों और हौसले की सराहना की।