Shimla News: हिमाचल प्रदेश अब केवल बाहरी पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य नहीं, बल्कि घरेलू यात्रा संस्कृति में भी देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के 80वें दौर के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है। राज्य के 77.9 फीसदी परिवारों ने एक महीने में कम से कम एक यात्रा पूरी की।
पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़कर ग्रामीण हिमाचल रहा सबसे आगे
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण हिमाचल यात्रा करने के मामले में सबसे आगे रहा है। प्रदेश के 79 प्रतिशत ग्रामीण और 72.5 प्रतिशत शहरी परिवारों ने यात्राएं कीं। यह आंकड़ा पंजाब के 65.4, हरियाणा के 55.4, जम्मू-कश्मीर के 65.6 और उत्तराखंड के 41.4 प्रतिशत के मुकाबले काफी ज्यादा है।
देश स्तर पर त्रिपुरा 89.7 प्रतिशत के साथ पहले और केरल 78.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हिमाचल में यात्रा के लिए बसें और निजी वाहन पहली पसंद रहे हैं। छुट्टियों के दौरान परिवहन पर सबसे अधिक 32 से 37 प्रतिशत तक खर्च दर्ज किया गया, जबकि होमस्टे और गैर-व्यावसायिक आवासों को भी प्राथमिकता मिली।
धार्मिक यात्राओं का दबदबा और अर्थव्यवस्था में पर्यटन का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू स्तर पर होने वाली यात्राओं में धार्मिक और तीर्थ यात्राओं की हिस्सेदारी सर्वाधिक 47.7 प्रतिशत रही। इसके बाद चिकित्सा सेवाओं के लिए 29.6 प्रतिशत और मनोरंजन के लिए 22.1 प्रतिशत यात्राएं हुईं। मई का महीना अवकाश और पारिवारिक भ्रमण के लिए सबसे अधिक व्यस्त समय दर्ज किया गया।
हिमाचल के 1,918 परिवारों से जुटाए गए आंकड़ों पर पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आरएस बाली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यात्रा गतिविधियां राज्य की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली का अभिन्न अंग हैं। राज्य सरकार अब ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे नीति और नए पर्यटन स्थलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित होकर काम कर रही है।