Shimla News: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग ने कार्य शुरू कर दिया है। शिमला में पूर्व न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में पहली बैठक हुई। आयोग भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय प्रभावों का अध्ययन कर मापदंड तय करेगा, जिसके बाद अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा।
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। राज्य सरकार द्वारा गठित प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग ने शिमला में अपनी पहली बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी ने की। बैठक के दौरान प्रदेश के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की गई और भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी नए जिले के गठन पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही किसी विशेष क्षेत्र का प्रस्ताव पारित हुआ है। वर्तमान में आयोग पूरे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन कर पुनर्गठन के उचित मानक तय करने पर काम कर रहा है।
जिलों से लेकर उप-तहसीलों तक की होगी समीक्षा
आयोग राज्य के मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों और विभिन्न सरकारी विभागों की प्रशासनिक इकाइयों का समग्र आकलन करेगा। नए प्रशासनिक क्षेत्रों के सृजन, विलय, विभाजन और पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों के परीक्षण के लिए विशेष मानदंड निर्धारित किए जाएंगे।
प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन में केवल जनसंख्या को ही आधार नहीं बनाया जाएगा। इसके तहत संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जिला या उपमंडल मुख्यालय तक आम जनता की पहुंच, प्रशासनिक कार्यक्षमता और नागरिक सुविधाओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। विशेषकर दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों की प्रशासनिक समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उपायुक्तों और संबंधित विभागों से जुटाए जाएंगे आंकड़े
प्रशासनिक व्यवस्था का सटीक मूल्यांकन करने के लिए आयोग ने सभी जिला उपायुक्तों और संबंधित विभागों से जनसांख्यिकीय आंकड़े, वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट और सुझाव मांगने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ भी विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि उन क्षेत्रों की पहचान हो सके जहां लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
वित्तीय प्रभाव और संसाधनों का रखा जाएगा ध्यान
आयोग की बैठक में पुनर्गठन के आर्थिक पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया गया। यदि नए जिले या उपमंडल बनाए जाते हैं, तो उनके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, नए सरकारी भवनों और कर्मचारियों की तैनाती से पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ने के साथ ही राज्य के खजाने पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े।
इस बैठक में आयोग के सदस्य अधिवक्ता विशाल पंवर, भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश शर्मा, सदस्य सचिव एवं भू-अभिलेख निदेशक तोरुल एस. रवीश, सामान्य प्रशासन सचिव डॉ. यूनुस तथा विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन उपस्थित रहे।