Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 8 वर्ष का सेवाकाल पूरा कर चुके ग्रामीण विद्या उपासकों को नियमित करने और उन्हें वरिष्ठता, वेतन वृद्धि तथा पदोन्नति के समस्त लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने ओम प्रकाश एवं अन्य की याचिका स्वीकारते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं को 2001 से 2004 के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा स्वयंसेवक नियुक्त किया गया था। बाद में 2009 में सरकार ने नीति बनाकर इन्हें अनुबंध आधार पर ग्रामीण विद्या उपासक के पद पर समायोजित किया था।
सरकार की दलीलें खारिज, 8 साल की सेवा पूरी करने पर मिलेगा लाभ
सरकार ने 2011 में नीति बनाकर 8 साल पूरे करने वालों को स्पेशल जेबीटी सर्टिफिकेट देकर नियमित करने का नियम बनाया था। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं को 11 साल बाद 2021 में नियमित किया गया। कोर्ट ने सरकार की टीईटी और कट-ऑफ संबंधी दलीलों को खारिज करते हुए भेदभाव को पूरी तरह गलत करार दिया।
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के सेवा विस्तार पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिए गए एक साल के सेवा विस्तार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। डॉ. अंजुम बाटुल की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन की पूरी पात्रता रखती हैं। पद रिक्त होने के बावजूद सरकार ने सेवानिवृत्त डॉक्टर को एक वर्ष का सेवा विस्तार दे दिया था। अदालत ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 5 नवंबर तय की है।
