Hyderabad News: केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने देश की आंतरिक सुरक्षा में आए क्रांतिकारी बदलावों का ब्योरा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत पिछले पचास वर्षों से नक्सलवाद, पूर्वोत्तर के उग्रवाद और आतंकवाद से जूझ रहा था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। हिंसक नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और पूर्वोत्तर में अलगाववादी आंदोलन बेहद सीमित दायरे में सिमट गया है।
गृह सचिव ने यह संबोधन सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आयोजित 78वें बैच के आईपीएस प्रोबेशनर्स के दीक्षांत समारोह में दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में जारी वर्तमान हालात कोई उग्रवाद नहीं, बल्कि केवल जातीय तनाव हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पारंपरिक खतरे घटने के बावजूद सुरक्षा बलों के सामने पांच नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
नारकोटिक्स, साइबर अपराध और आतंकवाद बनीं नई सुरक्षा चुनौतियां
गोविंद मोहन ने पहली बड़ी चुनौती के रूप में नशीले पदार्थों के बढ़ते नेटवर्क को रेखांकित किया। उन्होंने साल 2019 के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि देश की करीब 7 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में नशे का शिकार है। इसके अलावा दूसरी गंभीर चुनौती साइबर क्राइम है, जहां साधारण तकनीकी जानकारी वाले लोग भी आसानी से बड़े अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
तीसरी चुनौती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भले ही आतंकवाद कमजोर पड़ा है, लेकिन दिल्ली के लाल किले में हालिया धमाके संकेत देते हैं कि खतरा पूरी तरह टला नहीं है। इसके अलावा अवैध विदेशी नागरिकों की घुसपैठ और अपराधों का तकनीकी रूप से गुमनाम (एनोनिमस) होना दो अन्य मुख्य खतरे हैं, जिनसे निपटना भविष्य के पुलिस अधिकारियों के लिए बेहद अहम होगा।
