Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शिक्षा में समान अवसर देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि इन छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा।
यह कदम सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) कानून 2019 और नियम 2020 को लागू करने के लिए उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले के संदर्भ में राज्यों से मांगी गई जानकारी के बाद यह कार्यवाही आगे बढ़ी है।
बुलिंग और उत्पीड़न रोकने के सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ट्रांसजेंडर और जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिंग छात्रों को बिना किसी भेदभाव के पढ़ने का माहौल मिलेगा। सरकार ने स्कूलों को बुलिंग, उत्पीड़न और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल का गठन होगा। साथ ही हर शैक्षणिक संस्थान में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनेगी। यह कमेटी भेदभाव, यौन उत्पीड़न और हिंसा के मामलों की निगरानी करेगी और शिकायतों के समयबद्ध समाधान पर नजर रखेगी।
संबंधित विभागों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
इससे पहले विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के सशक्तिकरण निदेशालय ने स्कूल और उच्च शिक्षा निदेशालयों से रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पूछा गया था कि ट्रांसजेंडर छात्रों के स्वास्थ्य, बुलिंग रोकने और पढ़ाई बीच में छोड़ने जैसी समस्याओं को कम करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।