Shimla News: हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू करने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के इस कदम को युवा पीढ़ी के लिए घातक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
जयराम ठाकुर ने कहा कि देवभूमि हिमाचल के लोग हमेशा ऐसी प्रवृत्तियों से दूर रहे हैं। आर्थिक संकट का हवाला देकर सरकार नए टैक्स लगा रही है और अब राजस्व जुटाने के नाम पर लॉटरी शुरू कर रही है। सरकार का यह फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान कि लॉटरी से आदत नहीं लगेगी और यह केवल किस्मत का खेल है, एक बड़ा मजाक है। प्रदेश पहले से ही नशे की समस्या से जूझ रहा है और चिट्टा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। ऐसे में लॉटरी एक नई लत को जन्म देगी।
उन्होंने दावा किया कि अतीत में लॉटरी के कारण कई परिवार तबाह हो चुके हैं और लोगों को अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी थी। कर्ज के दबाव में कई लोगों ने आत्महत्या भी की थी। वर्ष 1999 के बाद प्रदेश इस सामाजिक बुराई से बाहर निकल पाया था।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार को ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां लोगों को अपनी मेहनत का फल मिले। हजारों लोगों की मेहनत का पैसा केवल एक व्यक्ति के भाग्य के नाम पर लुटाना सही नहीं है। सरकार जनता को गलत दिशा में धकेल रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भांग की खेती को वैध करने के प्रस्ताव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्ययन समिति ने भांग की खेती को वैध करने की कोई सिफारिश नहीं की थी। सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा के भीतर भी स्पष्ट जानकारी देने में नाकाम रही है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट में एक लाख नौकरियों और पांच साल में पांच लाख रोजगार का वादा किया गया था। युवा आज भी नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से विफल साबित हुई है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकाल में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 1.90 लाख थी, जो अब घटकर 1.72 लाख रह गई है। कर्मचारी और पेंशनर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। एचआरटीसी और एचपीटीडीसी कर्मी भी परेशान हैं। भाजपा इन जनहित के मुद्दों को सदन के भीतर मजबूती से उठाएगी।