Kangra News: प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (टांडा) में दवाओं की भारी किल्लत हो गई है। रोबोटिक सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को सामान्य बुखार, दर्द और उल्टी की दवाएं भी बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।
आठ जिलों के मरीजों को नहीं मिल रही बेसिक दवाएं
टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर से रोजाना सैकड़ों लोग बेहतर इलाज के लिए आते हैं। लेकिन अस्पताल में पैरासिटामोल, एमसेट, पेनटाप, एस्प्रिन, सिट्राजिन, ट्रामाडोल इंजेक्शन, नॉर्मल स्लाइन, ग्लव्स, स्प्रिट, कॉटन, बैंडेज और सिरिंज जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं मिल पा रही हैं।
कैंसर और किडनी रोगी भी डिस्पेंसरी के चक्कर काटने को मजबूर
डिस्पेंसरी में दिल की बीमारी, किडनी और कैंसर पीड़ितों को भी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक से मुख्य ओपीडी डिस्पेंसरी तक लंबी लाइनों में लगने के बाद भी मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इमरजेंसी में बेसिक मेडिकल सप्लाई न होने से तीमारदारों की फार्मेसी कर्मचारियों से बहस हो रही है।