Health News: कैंसर के कारणों को समझने और प्रभावी इलाज ढूंढने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। पहले शोध में आमतौर पर चूहों का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब बिल्लियां भी अध्ययन का हिस्सा बन गई हैं। नए शोध से बिल्लियों और इंसानों के ट्यूमर के बीच कई चौंकाने वाली समानताएं सामने आई हैं।
आनुवंशिक समानताओं से खुलेगा सटीक थेरेपी का रास्ता
बिल्लियों के कैंसर जेनेटिक्स के अध्ययन में कुछ अप्रत्याशित समानताएं मिली हैं। इन खोजों से न केवल बिल्लियों के सटीक इलाज का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि इंसानों में कैंसर पनपने के कारणों पर नई रोशनी पड़ी है। यह जानकारी दवाओं पर ट्यूमर के असर और शरीर की प्रतिक्रिया को गहराई से समझने में मददगार साबित होगी।
वैज्ञानिकों ने कैंसर आनुवंशिकी के उस रहस्य को सुलझाया है, जिसे रिसर्चर अब तक जेनेटिक “ब्लैक बॉक्स” कहते थे। साइंसडेली की रिपोर्ट के अनुसार, इस अध्ययन से दोनों प्रजातियों में ट्यूमर विकसित होने के कारणों की गुत्थी सुलझेगी। यह शोध इंसानों और जानवरों दोनों के लिए बेहतर थेरेपी विकसित करने में नई उम्मीद बनकर उभरा है।
बिल्लियों में बीमारी का बड़ा कारण है कैंसर
कैंसर पालतू बिल्लियों की बीमारी और मौत के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। इसके बावजूद बिल्लियों के ट्यूमर में आनुवंशिक बदलावों की जानकारी काफी सीमित थी। ग्वेल्फ विश्वविद्यालय के पैथोबायोलॉजी प्रोफेसर और शोध के सह-लेखक डॉ. जेफ्री वुड के अनुसार, इस नए अध्ययन ने उस लंबे वैज्ञानिक अंतर को खत्म कर दिया है।
