दिल्ली में हवा हुई बेहद जहरीली: कई इलाकों में AQI 400 के पार, ग्रैप-3 लागू होने के बावजूद राहत नहीं

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Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली के मौके पर वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शहर के अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रैप स्टेज-3 की सख्त पाबंदियां लागू किए जाने के बावजूद घने स्मॉग की वजह से सांस लेना दूभर बना हुआ है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण और घने स्मॉग की चपेट में है। दिवाली के अवसर पर राजधानी की आबो-हवा ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शहर का औसत एक्यूआई लगातार चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है, जबकि कई प्रमुख निगरानी केंद्रों पर यह आंकड़ा 400 के पार पहुंच चुका है।

आईआईटी दिल्ली, पंजाबी बाग, जहांगीरपुरी, रोहिणी, आरके पुरम और विवेक विहार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 से 450 के बीच दर्ज किया गया। राजधानी के 59 निगरानी केंद्रों में से कई स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई है और सड़कों पर लोगों को मास्क लगाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।

डॉक्टरों की चेतावनी और स्वास्थ्य संबंधी सलाह

हवा में मौजूद पीएम 2.5 के खतरनाक स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से बेवजह घर से बाहर निकलने से बचने, घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने और बाहर निकलते समय एन-95 मास्क लगाने की अपील की गई है।

वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, आगामी दिनों में मौसमी परिस्थितियों, धीमी हवाओं, पराली के धुएं और स्थानीय उत्सर्जन के चलते प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।

ग्रैप-3 की पाबंदियां और दिशा-निर्देश

हालात को नियंत्रित करने के लिए राजधानी और एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू किया गया है। इसके तहत:

  • गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाले चार पहिया वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है।
  • कार्यालयों को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित करने और शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का प्रावधान किया गया है।
  • प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार केवल सीमित अवधि के लिए ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी बदलाव और कमजोर हवाओं के चलते प्रदूषण से तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है।

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