Health News: दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके पीछे बैड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना मुख्य कारण है। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। यह धमनियों में प्लाक बनाकर रक्त प्रवाह को बाधित करता है।
अक्सर माना जाता है कि कोलेस्ट्रॉल केवल बुजुर्गों या अस्वस्थ जीवनशैली जीने वालों में बढ़ता है। हालांकि, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के बावजूद पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक कारणों से युवाओं में भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए 18 वर्ष की उम्र के बाद नियमित लिपिड प्रोफाइल जांच कराना जरूरी है।
कार्डियोलॉजी सोसाइटी के अनुसार तय करें अपना व्यक्तिगत लक्ष्य
जांच के बाद डॉक्टर से अपना सटीक बैड कोलेस्ट्रॉल स्तर अवश्य पूछें। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के मुताबिक सुरक्षित स्तर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। लो रिस्क के लिए 116 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम और मध्यम जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए 100 से कम स्तर होना चाहिए।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी के मरीजों के लिए यह लक्ष्य 70 से कम और अति-संवेदनशील लोगों के लिए 55 से कम होना जरूरी है। यदि दवाओं और जीवनशैली बदलाव से स्तर नियंत्रित न हो, तो डॉक्टर से अन्य चिकित्सीय विकल्पों और उन्नत थेरेपी पर समय रहते परामर्श लेना चाहिए।