Jalandhar News: सरहदों की बंदिशों को तोड़ते हुए पाकिस्तान का एक पारंपरिक सराइकी लोकगीत इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है। ‘छलरे छलरे वाल’ नाम के इस गीत को भारतीय पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपनी आवाज देकर दोनों देशों के संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।
प्रेमिका के अल्हड़ प्रेम और प्रेमी की सुंदरता का अनूठा वर्णन
यह लोकगीत पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब की समृद्ध सराइकी लोक संस्कृति का हिस्सा है। गीत में एक प्रेमिका अपने सांवले प्रेमी की तुलना कस्तूरी के फूल से करती है। ‘छलरे छलरे वाल’ का शाब्दिक अर्थ घुंघराले बाल होता है, जिसमें प्रेमी के कंधे की शॉल और हाथ के रुमाल की खूबसूरती बयां की गई है।
संगीत प्रेमियों का मानना है कि इस गीत की धुन वर्ष 1994 की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म मोहरा के सदाबहार गीत ‘ना कजरे की धार’ से काफी मिलती-जुलती है। मूल रूप से इस लोकप्रिय लोकगीत को पाकिस्तान के दिग्गज लोक गायक मुहम्मद हुसैन बंदियालवी ने अपनी आवाज में गाकर पहचान दिलाई थी।
हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी हैं ऐतिहासिक सराइकी संस्कृति की जड़ें
पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा द्वारा नया रूप दिए जाने के बाद यह गीत इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इससे पहले भी पाकिस्तान का ‘सम्मी मेरी वार’ लोकगीत काफी चर्चा में रहा था। आधुनिक संगीत के साथ मिलकर यह पुराना गीत युवाओं की पहली पसंद बन गया है।
सराइकी लोक संस्कृति की ऐतिहासिक जड़ें मुल्तान, बहावलपुर, डेरा गाजीखान और चोलिस्तान से जुड़ी हैं। इतिहासकारों के अनुसार इस संस्कृति का सीधा संबंध प्राचीन हड़प्पा सभ्यता से माना जाता है। सराइकी भाषा इंडो-आर्यन परिवार की एक प्रमुख भाषा है, जो आज भी पाकिस्तान के कई इलाकों में बड़े चाव से बोली जाती है।