New Delhi News: देश में स्वास्थ्य और समाज के लिए नुकसानदेह मानी जाने वाली वस्तुओं और लग्जरी सामानों पर सबसे अधिक टैक्स वसूला जाता है। भारत में सबसे ऊंचा जीएसटी स्लैब 40 फीसदी है, जो सिन गुड्स पर लागू होता है। इसके अलावा शराब और पेट्रोल-डीजल पर भी भारी टैक्स लगता है।
तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला जैसी चीजें सबसे अधिक टैक्स वाली श्रेणी में आती हैं। इन पर अतिरिक्त शुल्कों के साथ 40 फीसदी जीएसटी लागू होता है। भारी टैक्स के बाद भी देश में लगभग 28 से 30 फीसदी वयस्क, यानी करीब 27 से 37 करोड़ नागरिक तंबाकू उत्पादों का उपभोग करते हैं।
कोल्ड ड्रिंक, सोडा और एनर्जी ड्रिंक पर भी 40 फीसदी का अधिकतम जीएसटी स्लैब लगाया जाता है। भारत के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में इनका बड़ा मार्केट है। देश के लगभग 60 से 70 फीसदी परिवार और युवा सामान्य दिनों या त्योहारों पर इन कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का नियमित सेवन करते हैं।
बड़ी एसयूवी, लग्जरी कारें और 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली प्रीमियम बाइक्स पर 40 फीसदी जीएसटी लगता है। इन महंगे वाहनों का उपभोक्ता वर्ग काफी सीमित है। देश की केवल 1 से 2 फीसदी उच्च आय वाली आबादी ही इन प्रीमियम गाड़ियों की खरीदारी और इस्तेमाल करती है।
ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़ और कैसीनो को भी 40 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया है। देश में 40 करोड़ से अधिक सक्रिय गेमर्स मौजूद हैं। इनमें से लगभग 9 से 10 करोड़ यूजर रियल मनी ऑनलाइन गेमिंग ऐप का उपयोग करते हैं, जिससे यह बड़ा उपभोक्ता वर्ग बन चुका है।
शराब और पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं। इन पर केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट लगता है। शराब पर कुल टैक्स 50 से 70 फीसदी तक पहुंचता है। वहीं पेट्रोल-डीजल पर 45 से 50 फीसदी टैक्स का संयुक्त भार पड़ता है।
देश की करीब 14 से 15 फीसदी वयस्क आबादी, यानी लगभग 16 करोड़ नागरिक शराब पीते हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल का सीधा असर 80 फीसदी से अधिक जनता पर पड़ता है। निजी गाड़ियों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई के जरिए आम जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस ईंधन का इस्तेमाल करती है।
अधिकतम टैक्स दर कई उत्पादों पर लागू होती है, लेकिन उनके उपभोक्ताओं की तादाद अलग है। लग्जरी कारों का यूजर बेस बहुत कम है। दूसरी तरफ तंबाकू, शराब और ईंधन बड़े जनसमूह को छूते हैं। टैक्स दर, एमआरपी और उपभोग की फ्रीक्वेंसी मिलकर आम उपभोक्ता पर टैक्स का वास्तविक असर तय करते हैं।