Shimla News: जिला शिमला के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ पुलिस थाना सदर में गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। एक पुलिस कांस्टेबल की शिकायत पर उन पर धोखाधड़ी और सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप लगा है। इस कानूनी कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।
पुलिस लाइन कैंथू में तैनात पीड़ित कांस्टेबल ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2024 और 2025 में उसने सरकारी व्यवस्थाओं पर 1,87,890 रुपये अपनी जेब से खर्च किए थे। बिल पास होने के बावजूद 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी ने वाउचर पर दस्तखत करा लिए, लेकिन रकम कांस्टेबल के खाते में ट्रांसफर नहीं की गई।
फंड घाटे की भरपाई के लिए किया गया दुरुपयोग
जुलाई 2026 में हुई आंतरिक जांच में सामने आया कि कांस्टेबल के पैसे किसी अन्य फंड के घाटे को भरने में लगा दिए गए थे। रिकॉर्ड के मुताबिक जिला पुलिस के एक खाते से दो वर्षों में लगभग 2,35,000 रुपये की अवैध निकासी हुई थी। तबादला होने पर इस कमी को दबाने के लिए यह हेराफेरी की गई।
प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है। इसके बाद पूर्व एसएसपी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया। यह धाराएं सरकारी पद के दुरुपयोग, जालसाजी और धोखाधड़ी से जुड़ी हैं।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, जांच में जुटी टीम
वरिष्ठ स्तर के आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अपने ही विभाग में एफआईआर दर्ज होने से प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैल गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज केस के आधार पर सभी मूल दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर आगे की औपचारिक कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
