यू.पी.आई. पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन, दो अक्टूबर को मनेगा विरोध दिवस

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New Delhi News: यू.पी.आई. भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क के विरोध में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता और राष्ट्रीय महासचिव मुकंद मिश्रा की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में बाईस राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर आगामी रणनीति तय की है। इस आंदोलन के तहत दो अक्टूबर को देश भर में विरोध दिवस मनाया जाएगा।

सांसदों को ज्ञापन और बाजारों में लगेंगे बैनर

रणनीति के अनुसार दो अक्टूबर को देशभर के सांसदों को शुल्क समाप्त करने के लिए ज्ञापन सौंपा जाएगा। बाजारों में यू.पी.आई. पर शुल्क बंद करो और 0.4 प्रतिशत शुल्क स्वीकार्य नहीं जैसे नारों वाले बैनर और स्टिकर लगाए जाएंगे। इसके बाद सभी प्रतिक्रियाएं एकत्र कर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी ताकि व्यापारियों की बात मजबूती से रखी जा सके।

पंजाब में भी इस अभियान को बाजार स्तर तक पहुंचाया जाएगा और स्थानीय संगठनों को जोड़ा जाएगा। पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, व्यापारियों पर अतिरिक्त भुगतान का बोझ डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। छोटे और मध्यम व्यापारियों के सामने पहले से ही बैंक ब्याज, बिजली, किराया और कर अनुपालन जैसी कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।

अतिरिक्त लेनदेन शुल्क से प्रभावित होगी कार्यशील पूंजी

व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त लेनदेन शुल्क से उनके सीमित मुनाफे और कार्यशील पूंजी पर बुरा असर पड़ेगा। राष्ट्रीय महासचिव समीर जैन ने कहा कि यू.पी.आई. व्यवस्था को मजबूत करने की लागत का भार केवल छोटे व्यापारियों पर डालना पूरी तरह से अन्यायसंगत है। डिजिटल भुगतान से नकदी प्रबंधन और नोटों की छपाई की लागत में बड़ी बचत होती है, इसलिए इसके व्यापक आर्थिक लाभों का सही मूल्यांकन होना चाहिए।

प्यारे लाल सेठ ने कहा कि पूरा व्यापारी वर्ग यू.पी.आई. और डिजिटल अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है, लेकिन विरोध सिर्फ इस अतिरिक्त शुल्क का है। संगठनों ने एक बार फिर दोहराया कि इस आंदोलन का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को रोकना नहीं है, बल्कि एक पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देना है ताकि छोटे व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

Desh Raj
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